वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से मनोज पंत के कार्यकाल में विस्तार देना राज्य-केंद्र संबंधों में एक सकारात्मक संकेत है
कोलकाता। बंगाल सरकार को सोमवार को प्रशासनिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली जब केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव मनोज पंत के कार्यकाल को 6 महीने के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी। पहले उनका कार्यकाल 30 जून 2024 को समाप्त होने वाला था, लेकिन अब वे 31 दिसंबर 2025 तक मुख्य सचिव पद पर बने रहेंगे। राज्य सरकार ने 28 जून को केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को पत्र लिखकर मनोज पंत के कार्यकाल को बढ़ाने का अनुरोध किया था। उसी अनुरोध पर केंद्र सरकार ने सोमवार को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को चि_ी भेजकर इसकी मंजूरी की सूचना दी।
गौरतलब है कि मनोज पंत को 31 अगस्त 2024 को सेवानिवृत्त होने वाले भगवती प्रसाद गोपालिका की जगह मुख्य सचिव बनाया गया था। 1991 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज पंत प्रशासनिक सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जिलों के जिलाधिकारी रह चुके हैं। वर्ष 2009 से 2011 तक वे तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के निजी सचिव भी थे। उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी उल्लेखनीय है। वे विश्व बैंक में तीन साल तक वरिष्ठ सलाहकार रहे हैं। शुरुआत में उन्हें वित्त सचिव से स्थानांतरित कर सिचाई विभाग का सचिव बनाया गया था। लेकिन जब केंद्र ने गोपालिका के कार्यकाल विस्तार की मंजूरी नहीं दी, तब राज्य सरकार ने तेजी से निर्णय लेकर मनोज पंत को 24 घंटे के भीतर मुख्य सचिव बना दिया। अब उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कार्यकाल देकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह निरंतरता और प्रशासनिक स्थिरता चाहती है।
राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से मनोज पंत के कार्यकाल में विस्तार देना राज्य-केंद्र संबंधों में एक सकारात्मक संकेत है। क्योंकि इससे पहले भगवती गोपालिका के विस्तार के लिए राज्य का अनुरोध केंद्र ने अस्वीकार कर दिया था। मनोज पंत अब 31 दिसंबर 2025 तक बंगाल के मुख्य सचिव पद पर बने रहेंगे। उनके अनुभव और प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए, यह निर्णय राज्य सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं। यह विस्तार केवल एक नौकरशाही निर्णय नहीं, बल्कि आगामी प्रशासनिक रणनीति का भी संकेत है।