वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
उन्होंने अपने निजी सहयोगी पार्थ को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे सीआईडी का नोटिस स्वीकार कर लें
कोलकाता। सीआईडी के औचक कार्रवाई और लंबे इंतजार के बाद देर शाम मीडिया के सामने आए अभिषेक बनर्जी ने बेहद तल्ख और आक्रामक तेवर अख्तियार किए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी जांच से भाग नहीं रहे हैं और कानून का सम्मान करते हुए हमेशा सभी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करते आए हैं, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के इस तरह घर पहुंच जाना कतई उचित नहीं है। पूरे घटनाक्रम की परतें खोलते हुए सांसद अभिषेक बनर्जी ने बताया कि वह गुरुवार को ही दिल्ली से कोलकाता लौटे थे और अदालत के निर्देशों का सम्मान करते हुए सीधे भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने जांचकर्ताओं के तीखे सवालों का सामना किया और करीब साढ़े पांच घंटे तक चली मैराथन पूछताछ में अपना पूरा सहयोग दिया। उन्होंने याद दिलाया कि सीआईडी ने उन्हें आगामी 14 जून को दोबारा पेश होने का समन दिया है और वे उस दिन भी कानून के मुताबिक वहां जरूर उपस्थित होंगे। उन्होंने केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे अतीत में भी ईडी और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के सामने बार-बार पेश होते रहे हैं, इसलिए उनके भागने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार की प्रशासनिक टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सीआईडी की टीम उनके कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची, तब वे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित पार्टी की एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील सांगठनिक बैठक में शामिल थे। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें अधिकारियों के आने की भनक लगी, उन्होंने अपने निजी सहयोगी पार्थ को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे सीआईडी का नोटिस स्वीकार कर लें। इसके बावजूद, यदि जांच अधिकारी कानूनी औपचारिकता को दरकिनार कर केवल स्वयं उनके हाथों में ही नोटिस थमाने की जिद पर अड़े थे, तो फिर उन्हें इंतजार करना ही था। उन्होंने दोटूक लहजे में आपत्ति जताते हुए कहा कि कोई भी एजेंसी जब चाहे बिना किसी लिखित या मौखिक सूचना के किसी के घर का दरवाजा नहीं खटखटा सकती, अगर उन्हें पहले से सूचित किया जाता तो वे बैठक छोड़कर अपने घर पर ही उपलब्ध रहते।