सरकारी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद इस प्रस्ताव पर विधायी और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से काम शुरू किया जा सकता है
कोलकाता। बंगाल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम और दूरगामी निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आशुतोष कॉलेज, श्यामाप्रसाद कॉलेज और योगमाया देवी कॉलेज इन तीन प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों को मिलाकर एक पृथक विश्वविद्यालय गठित करने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति जता दी है।
सूत्रों के अनुसार, सरस्वती पूजा के अवसर पर योगमाया देवी कॉलेज पहुंचीं मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव की जानकारी कॉलेज प्रशासन और शिक्षाविदों के समक्ष रखी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यदि सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं सुचारु रूप से पूरी हुईं, तो विधानसभा चुनाव के बाद इस नए विश्वविद्यालय के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव से आशुतोष कॉलेज, श्यामाप्रसाद कॉलेज और योगमाया देवी कॉलेज के प्राचार्यों को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया है। मुख्यमंत्री ने संबंधित कॉलेजों से इस विषय में लिखित प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया है, ताकि विश्वविद्यालय गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
जानकारी के अनुसार, तीनों कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा तैयार किया गया विस्तृत लिखित प्रस्ताव काजरी बंद्योपाध्याय के माध्यम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंचाया जाएगा। प्रस्ताव में विश्वविद्यालय के ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्था, शैक्षणिक कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं का खाका शामिल किया जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कोलकाता की उच्च शिक्षा व्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा। नया विश्वविद्यालय बनने से कॉलेजों को अधिक शैक्षणिक स्वायत्तता, बेहतर प्रशासनिक संरचना,शोध और नवाचार के लिए नए अवसर,और छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद इस प्रस्ताव पर विधायी और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से काम शुरू किया जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकार को आवश्यक विधेयक लाना होगा और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। नया विश्वविद्यालय गठन का यह प्रस्ताव ममता बनर्जी सरकार के उस लक्ष्य को दर्शाता है, जिसमें राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार, संस्थागत सशक्तिकरण और अकादमिक गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।