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मप्र में 9 बच्चों की मौत की वजह बना कोल्ड्रिफ कप सिरप, बिक्री पर लगी रोक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्य प्रदेश में बैन कर दिया गया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है।

04 Oct 2025

मप्र में 9 बच्चों की मौत की वजह बना कोल्ड्रिफ कप सिरप, बिक्री पर लगी रोक

भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में रोग को दूर करने वाला 'कफ सिरप' ही बच्चों की मौत का कारण बन गया। यहां परासिया ब्लॉक के नौ बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्य प्रदेश में बैन कर दिया गया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सिरप बनाने वाली फैक्टरी कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद पिछले 20 दिन में नौ बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर बच्चों ने नागपुर के निजी अस्पतालों में दम तोड़ा। कई बच्चे अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन नंदूरकर ने बताया कि अब तक जिन नौ बच्चों की मौत हुई है, उनमें दिव्यांश चंद्रवंशी (7 वर्ष), अदनान खान (5 वर्ष), हेतांश सोनी (5), उसैद (4), श्रेया यादव (18 माह), विकास यदुवंशी (4), योगिता विश्वकर्मा (5 वर्ष), संध्या भोसोम (सवा साल) और चंचलेश यदुवंशी हैं।

दो बच्चों की मौत पिछले चार दिनों में हुई है। सवा साल की संध्या भोसोम 17 सितंबर को बीमार हुई थी। उसे 18 सितंबर को परासिया के निजी चिकित्सालय लाया गया था। फिर उसका इलाज सरकारी अस्पताल में चला। इसके बाद फिर परासिया के निजी चिकित्सालय में वापस 26 सितंबर को भर्ती किया गया। बाद में उसे सीएचसी परासिया से छिंदवाड़ा रेफर किया गया। छिंदवाड़ा जिला चिकित्सालय से संध्या को 28 सितंबर को नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। नागपुर में एक अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। संध्या के अलावा गायगोहान के चंचलेश यदुवंशी की भी नागपुर में उपचार के दौरान मौत हुई है।

क्षेत्र के एसडीएम शुभम यादव ने बताया कि छह बच्चों में 'कफ सिरप' की हिस्ट्री मिली है, जिसमें एक 'डाइएथिलीन ग्लायकॉल' केमिकल को मौत का जिम्मेदार माना जा रहा है। इन बच्चों में पांच में कोल्ड्रिफ और एक में नेक्सट्रॉस डीएस की हिस्ट्री मिली है। फिलहाल दोनों सिरप को बैन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे इलाके में 1420 बच्चों को मैपिंग की गई है। इन बच्चों को वायरल हुआ था। सभी पर नजर रखी जा रही है। परासिया में गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। निजी अस्पतालों को कहा गया है कि वे वायरल केस आने पर उसे ट्रीट न करें। सीधे सरकारी अस्पताल को सूचित करें। जो व्यवस्था सरकार की तरफ से बनाई गई है। उसमें बच्चे का इलाज होगा। उन्होंने बताया कि पानी की जांच की गई हैं। वे सभी सामान्य हैं।

दरअसल, छिंदवाड़ा जिले के नौ बच्चों की मौत की वजह बताए जा रहे कफ सिरप में जहरीले केमिकल की मिलावट पाई गई है। शुक्रवार को ही तमिलनाडु सरकार ने भी इसकी पुष्टि की थी। तमिलनाडु सरकार के ड्रग डिपार्टमेंट के अधिकारियों की जांच में श्रीसन कंपनी की कांचीपुरम यूनिट में हुई जांच में खुलासा हुआ है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप में 48.6 फीसद डाइथाइलीन ग्लॉयकाल की मिलावट है। ये एक जहरीला केमिकल है।

इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप के प्रोडक्शन और सेल पर प्रतिबंध लगा दिया है। तमिलनाडु सरकार द्वारा एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप के जिस बैच नंबर एसआर–13 को बच्चों की मौत के लिए संदिग्ध माना जा रहा है, उसे बनाने में दूषित केमिकल का इस्तेमाल हुआ है। तमिलनाडु ड्रग डिपार्टमेंट ने इस बैच की दवाओं के लिए सैंपल जांच के लिए भेजे थे, 24 घंटे में इसकी रिपोर्ट आ गई। इसी के बाद सरकार ने ये फैसला लिया।

क्या मिला जांच में?

कांचीपुरम जिले के सुंगुवर्चत्रम में स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल की यूनिट से कोल्ड्रिफ़ सिरप (बैच नंबर SR-13) जब्त किया गया। जांच में पता चला कि इसमें नॉन-फार्माकॉपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल हुआ, जो संभवतः डाइथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित था। दोनों ही केमिकल किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले जहरीले पदार्थ हैं। जैसे ही सैंपल चेन्नई की सरकारी ड्रग्स टेस्टिंग लैब में भेजे गए, वहां से 24 घंटे में रिपोर्ट दी गई।

तमिलनाडु सरकार ने रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि मध्य प्रदेश सरकार की ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी ने 1 अक्टूबर को 3.37 बजे कोल्ड्रिफ कफ सिरप की सूचना भेजी थी। एक और दो अक्टूबर को तमिलनाडु में सरकारी छुट्‌टी थी। इसके बावजूद हमने 27 मिनट के भीतर इस पर एक्शन लिया और जांच के आदेश जारी किए। तमिलनाडु सरकार के डिप्टी डायरेक्टर ड्रग कंट्रोलर एस गुरुभारती ने सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर की जांच टीम बनाई। उसी दिन ये टीम फैक्टरी में जांच के लिए पहुंची। इसके बाद अगले दिन यानी दो अक्टूबर को भी जांच टीम फैक्टरी पहुंची। जांच टीम को फैक्टरी में कई तरह के प्रोटोकाल के उल्लंघन मिले हैं।

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