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उनका दावा है कि दिल्ली पुलिस के पास निश्चित रूप से कुछ इनपुट होंगे, इसी वजह से वे सतर्कता बरत रही हैं
कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के बीच राजधानी में सोमवार सुबह अचानक सियासी तापमान चढ़ गया। बंगाल से दिल्ली लाए गए 'एसआईआर से प्रभावितÓ परिवारों के कथित उत्पीडऩ को लेकर ममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए। इस पर पलटवार करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री को दिल्ली पुलिस को उकसाने के बजाय सहयोग करने की सलाह दी और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि बताया। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि दिल्ली जैसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील शहर में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता स्वाभाविक है। उनका दावा है कि दिल्ली पुलिस के पास निश्चित रूप से कुछ इनपुट होंगे, इसी वजह से वे सतर्कता बरत रही हैं।
शुभेंदु ने कहा कि अगर मुर्शिदाबाद या कैनिंग जैसे इलाकों में आतंकवाद या कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों की आशंका हो सकती है, तो दिल्ली पुलिस का जांच-पड़ताल करना पूरी तरह जायज है। दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे पहले आती है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल भवन के आसपास दिल्ली पुलिस की असामान्य सक्रियता, इलाके की घेराबंदी और कथित तलाशी अभियान से डर का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल जाते हैं तो उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया जाता है, जबकि उनके लिए दिल्ली में ब्लैक कार्पेट बिछाया जा रहा है।
इस बयान पर शुभेंदु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए। दूसरे राज्यों में विपक्षी नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को जो सम्मान मिलता है, पश्चिम बंगाल में वही मुख्यमंत्री विपक्ष के साथ कैसा व्यवहार करती हैं, यह सब जानते हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में उनके खिलाफ 86 झूठे मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि उन्हें 104 कार्यक्रमों की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और करीब 11 महीने तक विधानसभा से निलंबित रखा गया। शुभेंदु ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को कम बोलना चाहिए, ज्यादा बोलने से राजनीतिक माहौल में बदबू फैलती है।