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क्रिकेट हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है, अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना जरूरी है: शेफाली वर्मा

भारतीय महिला टीम की सलामी बल्लेबाज़ शेफाली वर्मा ने कहा कि क्रिकेट उन्हें लगातार सीख देता है और बेहतर खिलाड़ी बनने के लिए अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना बेहद ज़रूरी है।

24 Dec 2025

क्रिकेट हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है, अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना जरूरी है: शेफाली वर्मा

विशाखापट्टनम, 24 दिसंबर (हि.स.)। भारतीय महिला टीम की सलामी बल्लेबाज़ शेफाली वर्मा ने कहा कि क्रिकेट उन्हें लगातार सीख देता है और बेहतर खिलाड़ी बनने के लिए अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना बेहद ज़रूरी है।

मंगलवार को विशाखापट्टनम में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में श्रीलंका के खिलाफ भारत को सात विकेट से जीत दिलाने के बाद शेफाली ने यह बात कही।

इस मुकाबले में शेफाली वर्मा ने 34 गेंदों पर नाबाद 69 रन की शानदार पारी खेली, जिसके लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। मैच के बाद शेफाली ने अपने खेल में आए बदलाव और आत्मविश्वास की वापसी पर बात करते हुए कहा कि बल्लेबाज़ी में खामियों को समझना और उन पर काम करना उनके लिए अहम रहा है।

शेफाली ने कहा,“क्रिकेट हमेशा आपको कुछ न कुछ सिखाता है। अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना बहुत जरूरी है, तभी आप सुधार कर सकते हैं। शुरुआत में गेंद थोड़ी रुककर आ रही थी, इसलिए मैंने जमीन पर खेलते हुए सिंगल लेने की कोशिश की। शुरुआती ओवरों में गेंदबाज़ों ने अच्छी गेंदबाज़ी की, लेकिन बाद में चीज़ें हमारे पक्ष में रहीं।”

उन्होंने मुख्य कोच अमोल मजूमदार का भी आभार जताया और बताया कि कठिन परिस्थितियों में कैसे बल्लेबाज़ी करनी है, इस पर उन्हें खास मार्गदर्शन मिला।

शेफाली ने कहा,“कोच ने मुझे पहले जमीन पर खेलने और फिर मौके मिलने पर हवा में शॉट खेलने की सलाह दी। मैंने खुद को शांत रखा, जमीन पर खेलती रही और जब गेंद सही आने लगी तो रन बनाए। मुझे भरोसा है कि अगर मैं जमीन पर खेलूं तो रन जरूर बना सकती हूं।”

गौरतलब है कि शेफाली ने चोटिल प्रतीका रावल के स्थान पर वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल में टीम में वापसी की थी, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में अर्धशतक लगाने के साथ दो विकेट भी झटके थे।

इससे पहले मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी चुनी। श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू ने पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत करते हुए भारतीय गेंदबाज़ों पर दबाव बनाया। हालांकि, स्नेह राणा के आने के बाद मैच का रुख बदल गया। अस्वस्थ दीप्ति शर्मा की जगह खेलते हुए राणा ने चार ओवर में सिर्फ 11 रन देकर अटापट्टू का विकेट लिया और श्रीलंका की रनगति पर ब्रेक लगाया।

अटापट्टू के आउट होते ही श्रीलंका की पारी लड़खड़ा गई। हर्षिता समरविक्रमा ने संघर्ष किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिला। भारतीय स्पिनरों ने लगातार दबाव बनाए रखा। वैष्णवी शर्मा ने अहम विकेट लिए, जबकि श्री चरनी ने पहले मैच की खराब शुरुआत से उबरते हुए दो बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेजा। तीन रनआउट भी श्रीलंका के लिए नुकसानदेह साबित हुए और पूरी टीम एक साधारण स्कोर पर सिमट गई।

लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत में स्मृति मंधाना 16 रन बनाकर आउट हुईं, लेकिन इसके बाद शेफाली वर्मा ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने स्पिन और तेज़ गेंदबाज़ी दोनों पर आक्रामक अंदाज़ में रन बटोरे। इनोका रणवीरा और शशिनी गिम्हानी उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी का शिकार बनीं, जबकि चमारी अटापट्टू के एक ओवर में शेफाली ने 4, 6 और 4 जड़ दिए। दूसरी ओर, जेमिमा रोड्रिग्स ने भी तेज़ रन बनाकर अच्छा साथ निभाया, जिससे भारत ने 12वें ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया।
 

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