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पूर्व नियोजित थी डॉक्टर से दरिंदगी, सीबीआई को मिले सबूत

राजनीतिक हस्तियों को सता रहा था पर्दाफाश का डर?

03 Nov 2024

पूर्व नियोजित थी डॉक्टर से दरिंदगी, सीबीआई को मिले सबूत

कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में महिला डॉक्टर से दरिंदगी की घटना पूर्व नियोजित थी। सीबीआई जांच में ऐसे संकेत मिले हैं। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि जांच में जो तथ्य मिल रहे हैं, उससे प्रतीत हो रहा है कि आरजी कर अस्पताल में व्याप्त आर्थिक भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होने के डर से इस वारदात को अंजाम दिया गया था। आर्थिक भ्रष्टाचार के पीछे एक बड़ी साजिश है और इसमें राजनीतिक रूप से प्रभावशाली कई लोगों का हाथ होने का अनुमान है। अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष व टाला थाने के पूर्व ओसी अभिजीत मंडल के मोबाइल फोन की फारेंसिक जांच में सुबूतों को मिटाने में उनकी सक्रिय भूमिका के प्रमाण मिले हैं। 
गौर करने वाली बात यह है कि वारदात के पूर्व नियोजित व इसके पीछे बड़ी साजिश होने का संकेत मिलने पर भी सीबीआई की ओर से अदालत में जो चार्जशीट जमा की गई है, उसमें अस्पताल में ड्यूटी करने वाले सिविक वॉलंटियर संजय राय को ही एकमात्र मुख्य आरोपित बताया गया है। उससे पहले वारदात की आरंभिक जांच में कोलकाता पुलिस ने भी संजय राय को एकमात्र मुख्य आरोपित बताते हुए उसे गिरफ्तार किया था। सीबीआई हालांकि इस मामले में संदीप घोष व अभिजीत मंडल को गिरफ्तार कर चुकी है। संदीप घोष को ईडी ने भी आरजी कर अस्पताल में आर्थिक भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। 
सीबीआई अधिकारियों के निष्कर्षों के अनुसार, एमबीबीएस चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं 2021 में हुईं थीं। इसमें घोष ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन गड़बडिय़ों को सबसे पहले एक व्हिसलब्लोअर और आरजी कर के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली ने उजागर किया था, जिनकी याचिका के आधार पर कलकत्ता हाई कोर्ट की एकलपीठ ने सीबीआइ को मामले के वित्तीय पहलू की जांच करने का निर्देश दिया था। सूत्रों ने बताया कि सीबीआइ अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट के साथ 2021 में एमबीबीएस चयन से संबंधित कुछ प्रासंगिक सहायक सबूत हाई कोर्ट को सौंपे हैं। दस्तावेजों में काल रिकार्ड और कुछ वायस मैसेज शामिल हैं, जो गलत कार्यों में घोष की संलिप्तता का संकेत देते हैं। जांच अधिकारियों को हाउस स्टाफ के चयन में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं मिली हैं। हाउस स्टाफ के चयन में गड़बड़ी का एक बेहतरीन उदाहरण घोष का करीबी विश्वासपात्र आशीष पांडे है। 
सीबीआइ अधिकारियों ने पांडे को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है। इस बीच, ईडी ने भी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दाखिल करने के बाद वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच में स्वत: प्रवेश किया है।

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