टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित
'नेताओं की अनैतिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं होगी'
कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बंगाल दौरे के बाद राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी एक्शन मोड में आ गई है। रविवार रात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के आवास पर आयोजित भाजपा कोर कमेटी की उच्चस्तरीय बैठक में संगठन को मजबूत करने, सुशासन सुनिश्चित करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने को लेकर कई दूरगामी और कड़े फैसले लिए गए। इस बैठक में पार्टी नेतृत्व ने बिना किसी लाग-लपेट के बेहद स्पष्ट संदेश दिया है कि सत्ता में होने का अनुचित लाभ उठाने वाले किसी भी नेता या कार्यकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा और संगठन के भीतर अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई इस अहम बैठक में भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल, अमित मालवीय, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, संगठन महामंत्री अमिताभ चक्रवर्ती और सांसद सौमित्र खां समेत कई वरिष्ठ दिग्गज शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि यदि कोई भी पार्टी नेता या कार्यकर्ता हिंसा, जबरन वसूली, सिंडिकेट चलाने या किसी भी तरह की गैर-कानूनी अथवा अनैतिक गतिविधि में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत और बिना किसी हिचकिचाहट के कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कोर कमेटी ने तय किया है कि इस सख्त नीति का संदेश निचले स्तर तक पहुँचाने के लिए जिला व ब्लॉक स्तर के सभी पदाधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से सतर्क किया जाएगा।
बैठक में हाल के दिनों में अन्य दलों को छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले नए नेताओं की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखने और पार्टी की मूल विचारधारा व संगठनात्मक अनुशासन को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, राज्य सरकार और पार्टी संगठन के बीच कार्यों का स्पष्ट विभाजन तय करते हुए दोनों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने की रणनीति बनाई गई, ताकि सरकार की उपलब्धियों और लोक-कल्याणकारी नीतियों का लाभ आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँच सके।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य पहले ही यह दोहरा चुके हैं कि भाजपा बंगाल की पुरानी और दूषित राजनीतिक संस्कृति को बदलने के ठोस वादे के साथ सत्ता में आई है।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि पार्टी किसी भी कीमत पर तृणमूल कांग्रेस के दौर की कार्यशैली को नहीं दोहराएगी। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए कोर कमेटी की इस बैठक में संगठनात्मक अनुशासन, पारदर्शिता और सुशासन को ही सर्वोपरि प्राथमिकता देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।