राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ
2019 के उपचुनाव में प्रदीप सरकार ने भाजपा के प्रेमचंद झा को करीब 20 हजार वोटों से हराया था। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार हिरण्मय चटर्जी से करीब 3800 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद तृणमूल ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।
खड़गपुर। खड़गपुर में इस बार मुकाबला दो पूर्व विधायकों के बीच बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने सोमवार को ही दिलीप घोष को मैदान में उतार दिया था, जबकि मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस ने ‘बाड़ीर छेले’ (धरतीपुत्र) प्रदीप सरकार उर्फ खोकन को उम्मीदवार घोषित कर दिया। उम्मीदवार बनते ही प्रदीप सरकार ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दिलीप घोष कोई फैक्टर ही नहीं हैं।
2019 के उपचुनाव में प्रदीप सरकार ने भाजपा के प्रेमचंद झा को करीब 20 हजार वोटों से हराया था। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार हिरण्मय चटर्जी से करीब 3800 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद तृणमूल ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।
दूसरी ओर, दिलीप घोष ने 2016 में खड़गपुर सदर सीट से पहली बार चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की मजबूत शुरुआत की थी। उस समय वे एक नए चेहरे के तौर पर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से उभरते हुए, नई टीम और जबरदस्त ऊर्जा के साथ मैदान में उतरे थे और जीत दर्ज कर सभी का ध्यान खींचा था। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम मेदिनीपुर से सांसद बनकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बर्धमान-दुर्गापुर सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी चुनावी यात्रा में एक अहम मोड़ भी आया।
अब खड़गपुर में दिलीप बनाम प्रदीप की सीधी टक्कर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुकाबला कड़ा और कांटे का हो सकता है। प्रदीप ने जहां खुद को ‘खड़गपुर का बेटा’ बताते हुए कहा कि यहां के लोग अपने ही बेटे को चाहते हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दिलीप घोष ने क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया।
हालांकि दिलीप घोष ने अभी तक प्रदीप सरकार पर सीधा हमला नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि तृणमूल ने अपना उम्मीदवार उतारा है, लेकिन खड़गपुर की जनता भाजपा के साथ है।
बुधवार सुबह से ही दिलीप घोष के खड़गपुर में कई कार्यक्रम तय हैं। जानकारी के मुताबिक, वे शहर के प्रमुख मंदिरों में दर्शन करेंगे और अपने सहयोगियों के साथ सहभोज में भी शामिल होंगे। उनके बंगले में इस आयोजन की तैयारी की गई है, जहां से आगे की चुनावी रणनीति तय होने के संकेत हैं।
दिलीप घोष के सामने प्रदीप सरकार के उम्मीदवारी के सवाल पर भाजपा जिला सदस्य सुनील यांडा ने फोन पर कहा कि तृणमूल ने अपने हिसाब से खड़गपुर में अपना मजबूत उम्मीदवार उतारा है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री के विशेष समुदाय को लेकर हालिया बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या प्रदीप सरकार उस बयान का समर्थन करते हैं? उन्होंने कहा कि खड़गपुर का हिंदू समाज समझदार है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब जरूर देगा।
अब इस चुनावी मुकाबले में देखना दिलचस्प होगा कि ‘स्थानीय चेहरा’ बनाम ‘दबंग नेता’ की इस टक्कर में खड़गपुर की जनता किसे अपना समर्थन देती है।