'तोर बापेर गोली? मुझे गोली दिखा रहे हो?'
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की जंग जैसे-जैसे परवान चढ़ रही है, भाजपा के कद्दावर नेता और खडग़पुर सदर से उम्मीदवार दिलीप घोष ने अपने पुराने दबंग अंदाज़ में वापसी कर ली है। खडग़पुर में आयोजित एक चुनावी जनसभा के दौरान दिलीप ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए न केवल उन पर गंभीर आरोप लगाए, बल्कि मंच से ही खुली चेतावनी दे डाली। उनके इस आक्रामक बयान के बाद क्षेत्र का सियासी पारा एकाएक सातवें आसमान पर पहुँच गया है। सभा को संबोधित करते हुए दिलीप घोष ने स्थानीय थाना प्रभारी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम कर रही है। घोष ने दावा किया कि हमारे कार्यकर्ताओं को थाने ले जाकर डराया जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है कि अगर तृणमूल के साथ काम नहीं किया, तो चुनाव के बाद गोली मार दी जाएगी। पुलिस की इस कथित धमकी पर पलटवार करते हुए दिलीप घोष ने मंच से ही ललकारते हुए कहा कि तोर बापेर गोली? (तेरे बाप की गोली है?) कितनी गोली है तेरे पास? मुझे गोली दिखा रहे हो? उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस की वर्दी का रौब दिखाकर भाजपा कार्यकर्ताओं को दबाने की कोशिश न की जाए, वरना इसके परिणाम गंभीर होंगे। दिलीप घोष ने अपने भाषण में पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए कहा कि उन्होंने खडग़पुर में पहले भी कई बड़े-बड़े गुंडों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना किया है। उन्होंने अधिकारियों को संदेश दिया कि वे किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और अगर प्रशासन ने अपना पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं बदला, तो वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं। उनके इस बयान को कार्यकर्ताओं के भीतर जोश भरने और उन्हें निडर होकर काम करने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस के साथ-साथ दिलीप घोष के निशाने पर रेलवे का एक अधिकारी भी रहा। उन्होंने एक हालिया घटना का जि़क्र करते हुए दावा किया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी।
घोष ने अपनी राजनीतिक रसूख का प्रदर्शन करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप के बाद उस अधिकारी का दो मिनट में ट्रांसफर करा दिया गया। इस बयान के जरिए उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि जनता और कार्यकर्ताओं के हितों के बीच आने वाले किसी भी अधिकारी को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। खडग़पुर सदर सीट, जहाँ से दिलीप 2016 में पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुँचे थे, इस बार फिर से राज्य की सबसे चर्चित सीटों में से एक बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोष का यह आक्रामक रुख उनके समर्थकों को एकजुट करने का एक तरीका है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी से चुनाव आयोग की सख्ती और विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया का सामना भी करना पड़ सकता है।
फिलहाल, दिलीप घोष की इस 'रणभेरी' ने खडग़पुर के मुकाबले को पूरी तरह से एकतरफा से हटाकर बेहद दिलचस्प बना दिया है।