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हार के बाद तृणमूल में असंतोष, मुखर हुए पुराने नेता

कुछ नेताओं ने पार्टी को ‘कॉरपोरेट’ संस्कृति वाला बताया है, तो कुछ ने संगठन की मौजूदा स्थिति के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकारों को जिम्मेदार ठहराया है।

14 May 2026

हार के बाद तृणमूल में असंतोष, मुखर हुए पुराने नेता

खड़गपुर। चुनाव में करारी हार के बाद पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तृणमूल कांग्रेस के कई पुराने नेता और कार्यकर्ता खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करने लगे हैं। कुछ नेताओं ने पार्टी को ‘कॉरपोरेट’ संस्कृति वाला बताया है, तो कुछ ने संगठन की मौजूदा स्थिति के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकारों को जिम्मेदार ठहराया है।

आलोचना करने वाले अधिकतर नेता पार्टी के पुराने कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी को सत्ता में लाने के लिए जिन्होंने कठिन समय में संघर्ष किया, उन्हें बाद में उचित सम्मान नहीं मिला।

कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब पार्टी को संभाल कर रखना भी चुनौती बन सकता है, क्योंकि संगठन के भीतर ही असंतोष बढ़ रहा है और आम लोगों में भी नाराजगी दिखाई दे रही है। इसलिए चुनाव परिणाम आने के बाद तृणमूल के कई नेता और कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से सक्रिय नजर नहीं आए।

बताया जाता है कि 1998 में पार्टी गठन के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई बार पश्चिम मेदिनीपुर आई थीं और खड़गपुर के एक होटल में भी ठहरी थीं। उस समय स्थानीय कार्यकर्ता उनकी मदद करते थे और क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचते थे। हालांकि पार्टी के सत्ता में आने के बाद वे दोबारा वहां नहीं गईं।

जिले के कुछ पुराने नेताओं का आरोप है कि जिन कार्यकर्ताओं ने संघर्ष के दिनों में पार्टी को खड़ा किया, उन्हें बाद में संगठन में महत्व नहीं दिया गया। कई नेताओं के नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों तक काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।

नारायणगढ़ के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत अट्टा ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि पार्टी कॉरपोरेट शैली में चलेगी और रणनीतिक सलाहकार ही निर्णय करेंगे, तो पुराने कार्यकर्ताओं के लिए वहां जगह नहीं बचेगी।

वहीं, टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व विधायक विक्रमचंद्र प्रधान ने भी संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी गई, जिसका परिणाम चुनाव में देखने को मिला।

इस बीच घाटल जिले के तृणमूल अध्यक्ष अजीत माइती ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी में कुछ अवसरवादी लोग होते हैं, जो इस समय आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है और यदि कोई अनुशासन तोड़ेगा तो उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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