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स्थानीय प्रशासन अब इस दोहरी मशीन व्यवस्था के लिए मतदान कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी में जुट गया है
कोलकाता। भांगड़ विधानसभा क्षेत्र एक अनूठे कारण से चर्चा का केंद्र बन गया है। प्रदेश के अन्य सभी विधानसभा क्षेत्रों के उलट भांगड़ में मतदान की प्रक्रिया इस बार बिल्कुल अलग और ऐतिहासिक होने जा रही है। निर्वाचन आयोग ने इस क्षेत्र के प्रत्येक मतदान केंद्र पर एक के बजाय दो-दो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पूरे बंगाल में भांगड़ एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहाँ मतदान के लिए इस प्रकार की विशेष तकनीकी व्यवस्था करनी पड़ी है। इस निर्णय के पीछे का मुख्य कारण भांगड़ में चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों की भारी संख्या है।
निर्वाचन नियमावली के अनुसार, एक सामान्य ईवीएम यूनिट में कुल 16 बटन होते हैं। इनमें से 15 बटन विभिन्न दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होते हैं, जबकि 16वां बटन 'नोटाÓ (इनमें से कोई नहीं) के लिए तय रहता है। तकनीकी रूप से यदि किसी क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या 15 से अधिक हो जाती है, तो एक मशीन में सभी के नाम और चुनाव चिन्ह समाहित करना संभव नहीं रह जाता। भांगड़ में इस बार कुल 19 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें 7 प्रत्याशी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से हैं और 12 निर्दलीय मैदान में डटे हैं। इसी विवशता के चलते चुनाव आयोग को यहाँ प्रत्येक बूथ पर दो मशीनों को जोड़कर मतदान संपन्न कराने का आदेश देना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव के शुरुआती चरण में राज्य के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही थी। कूचबिहार दक्षिण और करणदीघी जैसे विधानसभा क्षेत्रों में भी नामांकन के वक्त प्रत्याशियों की संख्या काफी अधिक थी, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि वहां भी दो-दो मशीनों की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वहां उम्मीदवारों की संख्या घटकर 15 या उससे कम रह गई। अंतत: भांगड़ ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र बचा, जहां 19 उम्मीदवारों के डटे रहने के कारण दो मशीनों का उपयोग अनिवार्य हो गया है। अगर आंकड़ों और इतिहास पर गौर करें, तो बंगाल के चुनावी सफर में यह स्थिति विरल ही देखने को मिलती है। साल 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य के किसी भी हिस्से में ऐसी नौबत नहीं आई थी और सभी सीटों पर एक ही मशीन से मतदान प्रक्रिया संपन्न हो गई थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में कोलकाता दक्षिण और जादवपुर जैसी हाई-प्रोफाइल संसदीय सीटों पर उम्मीदवारों की अधिकता के कारण दो ईवीएम का प्रयोग किया जा चुका है।
आयोग का कहना है कि भांगड़ में यह व्यवस्था निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए की गई है, ताकि मतदाताओं को अपना प्रतिनिधि चुनने में किसी तकनीकी बाधा का सामना न करना पड़े। स्थानीय प्रशासन अब इस दोहरी मशीन व्यवस्था के लिए मतदान कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी में जुट गया है।