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तृणमूल के शासनकाल में जनता की सेवा के बजाय लूट-खसोट को प्राथमिकता दी गई - अग्निमित्रा पाल

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा

26 May 2026

तृणमूल के शासनकाल में जनता की सेवा के बजाय लूट-खसोट को प्राथमिकता दी गई - अग्निमित्रा पाल

कोलकाता। महिला व शिशु कल्याण विभाग की मंत्री अग्निमित्रा पाल कहा कि राज्य की राजनीतिक स्थिति, प्रशासनिक कार्यशैली और कानून-व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने वर्षों में जनता की सेवा के बजाय लूट-खसोट को प्राथमिकता दी गई और अब सत्ता परिवर्तन के बाद वे खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि उत्तर 24 परगना मे तृणमूल कांग्रेस के पार्षद, जो पिछले 15 वर्षों से पदों पर बने हुए थे, भाजपा सरकार आने के बाद या तो इस्तीफा दे रहे हैं या कार्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे उनकी गैर-जिम्मेदारी और स्वार्थी मानसिकता उजागर होती है।
भाजपा में शामिल होने को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया है कि फिलहाल एक-दो महीनों तक किसी भी तृणमूल कार्यकर्ता को पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। पार्टी इस विषय पर विचार कर रही है।
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फेंसिंग की स्थिति कमजोर थी, जिसके कारण रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। भाजपा सरकार बनने के 15 दिनों के भीतर ही सीमा पर फेंसिंग के लिए भूमि उपलब्ध कराकर बीएसएफ को आमंत्रित किया गया है। साथ ही घुसपैठियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्हें विधिवत वापस भेजा जाएगा।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत और नगर निकायों में ओपन टेंडर के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले किए गए। उन्होंने हाल ही में दीपांकर सरकार की गिरफ्तारी और 80 लाख रुपये की बरामदगी का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक उदाहरण है, जबकि वास्तविक घोटालों का हिसाब लगाना मुश्किल हो रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा और पहनावे को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि महिलाएं क्या पहनेंगी और कब बाहर निकलेंगी, यह उनका अधिकार है। सरकार का काम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी होर्डिंग में भाषा या वर्तनी की गलती है और वह सरकारी नहीं है, तो उसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक बैठकों और विकास कार्यों को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में विपक्ष के विधायकों को कभी आमंत्रित नहीं किया जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है और अब प्रशासनिक बैठकों में सभी दलों के जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है, ताकि विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पार्षदों और अध्यक्षों के इस्तीफे या निष्क्रियता के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में विधायकों के माध्यम से और प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। मानसून से पहले शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को सक्रिय किया गया है।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “ज़ीरो एफआईआर” जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाते हुए हर मामले में तुरंत जांच शुरू की जाएगी। संबंधित मामले में उन्होंने बताया कि पीड़िता के अलग-अलग बयानों के कारण जांच जारी है और महिला एवं बाल कल्याण विभाग भी इस पर नजर बनाए हुए है।
अंत में उन्होंने पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया गया। उन्होंने प्रशांत बर्मन जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्हें पहले खोजा नहीं जा सका, उन्हें भाजपा सरकार ने कुछ ही दिनों में ढूंढ निकाला। साथ ही शेख शाहजहां तथा जहांगीर जैसे लोगों को संरक्षण दिए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि इन सभी मामलों की जांच कराई जाएगी।

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