राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ
जांच के दायरे में सुरश्री कर, सम्राट घोष और सुभाजित चक्रवर्ती जैसे संदिग्ध नाम आए हैं, जिन पर इस पूरे गोरखधंधे को संचालित करने का आरोप है
कोलकाता। चुनाव की रणभेरी बजते ही केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सोमवार तड़के प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध कॉल सेंटर और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए राज्य के कई जिलों में एक साथ प्रहार किया। केंद्रीय सुरक्षा बलों के कड़े पहरे के बीच ईडी की टीमों ने कोलकाता के बोराल, हावड़ा, दुर्गापुर और सिलीगुड़ी समेत 10 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की, जिससे ठगी के कारोबार से जुड़े सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। यह पूरी कार्रवाई अवैध कॉल सेंटरों के जरिए विदेशी नागरिकों और आम लोगों से की गई करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़ी है। जांच के दायरे में सुरश्री कर, सम्राट घोष और सुभाजित चक्रवर्ती जैसे संदिग्ध नाम आए हैं, जिन पर इस पूरे गोरखधंधे को संचालित करने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह तकनीकी सहायता देने के नाम पर विदेशों में फोन करता था और झांसे में लेकर लोगों की गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर उनके खातों पर डाका डालता था।
जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर भी है कि क्या इन अवैध कॉल सेंटरों से अर्जित काली कमाई का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा था। गौरतलब है कि वर्ष 2021 और 2024 के चुनावों के दौरान भी ऐसे डिजिटल सिंडिकेट्स की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद हुई इस बड़ी कार्रवाई ने राज्य की सियासत में वेंडेटा पॉलिटिक्स यानी राजनीतिक प्रतिशोध की बहस को भी जन्म दे दिया है। हालांकि, ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पुख्ता सबूतों और वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर की गई है, जिसका उद्देश्य साइबर अपराध के इस अंतरराष्ट्रीय मकडज़ाल को जड़ से मिटाना है।