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देवाशीष कुमार हफ्ते भर में दूसरी बार तलब
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ उम्मीदवार जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज कर दी हैं। ईडी ने जमीन कब्जा मामले में तृणमूल के दिग्गज नेता और मौजूदा उम्मीदवार देवाशीष कुमार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार सुबह उन्हें एक बार फिर पूछताछ के लिए कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स बुलाया गया, जहां वे नियत समय से पहले ही पहुंच गए। देवाशीष कुमार की ईडी दफ्तर में यह दूसरी बड़ी पेशी है। इससे पहले बीते सोमवार को भी अधिकारियों ने उनसे घंटों पूछताछ की थी। जांच का केंद्र वह जमीन कब्जा मामला है, जिसमें अब तक 16-17 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। हालांकि, देवाशीष कुमार ने मीडिया से बातचीत में बेहद सधा हुआ रुख अपनाया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक जनप्रतिनिधि और नागरिक के तौर पर वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस पूरी प्रक्रिया का उनके चुनाव अभियान या मतदाताओं के भरोसे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शुक्रवार को दफ्तर में प्रवेश करते समय उन्होंने केवल इतना कहा कि भीतर जाकर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। ईडी की जांच केवल पूछताछ तक सीमित नहीं है। हाल ही में कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब दक्षिण कोलकाता के कसबा इलाके में कारोबारी विश्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' के घर पर छापा मारा गया। वहां से ईडी ने करीब 2 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी, भारी मात्रा में सोना, महंगी गाडिय़ां और कई संदिग्ध संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामदगी की लिस्ट में आग्नेयास्त्रों का होना मामले को और अधिक गंभीर बना रहा है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सोना पप्पू के संबंध तृणमूल के शीर्ष नेताओं से हैं, जिसे सत्ताधारी दल चुनावी हथकंडा बताकर खारिज कर रहा है। रासबिहारी सीट इस बार राज्य के सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में से एक है। तृणमूल कांग्रेस ने जहां अपने अनुभवी नेता देवाशीष कुमार पर भरोसा जताया है।
वहीं भाजपा ने उनके सामने प्रखर वक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता को मैदान में उतारकर मुकाबले को कांटे का बना दिया है। इस क्षेत्र में 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक 25 दिन पहले उम्मीदवार का बार-बार ईडी दफ्तर के चक्कर लगाना टीएमसी के लिए चिंता का विषय हो सकता है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने का सुनहरा मौका मान रही है। बंगाल की सभी 294 सीटों के साथ रासबिहारी के भविष्य का फैसला 4 मई को होगा। फिलहाल, ईडी की यह कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक संदेश छिपा है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना साफ है कि रासबिहारी की गलियों में अब चुनावी वादों से ज्यादा चर्चा ईडी की छापेमारी और बरामद हुए नोटों की हो रही है।