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मलबे और दहशत के बीच फंसे 22 लोगों का रेस्क्यू
कोलकाता। भीड़भाड़ वाले जोड़ासांको इलाके में शुक्रवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। 104 एम.एम. बर्मन स्ट्रीट स्थित एक जर्जर बहुमंजिला इमारत का हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया, जिससे पूरी इमारत में चीख-पुकार मच गई। हादसे के वक्त इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, तभी सीढ़ी और निर्माण से जुड़ा एक हिस्सा ढह गया। इस घटना के कारण करीब 22 निवासी मलबे और क्षतिग्रस्त हिस्से के पीछे फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए पुलिस और दमकल विभाग को घंटों की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
कोलकाता नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, 70-80 साल पुरानी यह इमारत पहले से ही बेहद खतरनाक श्रेणी में सूचीबद्ध थी। इमारत के बाहर निगम का चेतावनी बोर्ड भी लगा हुआ था, जो साफ तौर पर यहां रहने के खतरे को बयां कर रहा था। बावजूद इसके, शुक्रवार सुबह यहां निर्माण कार्य चल रहा था। स्थानीय पार्षद मोहम्मद जसीमुद्दीन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उनका दावा है कि सीढ़ी नहीं बल्कि बाथरूम का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, हालांकि मलबे की वजह से लोगों का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था। हादसे के बाद इलाके में भारी तनाव देखा गया। इमारत में रहने वाले परिवारों ने मकान मालिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
निवासियों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मरम्मत का काम शुरू कराया गया, जिसकी वजह से यह दुर्घटना हुई। हैरानी की बात यह रही कि बचाव अभियान के दौरान कुछ डरे हुए निवासी अपनी घर-गृहस्थी और सामान के मोह में इमारत छोडऩे को तैयार नहीं थे, जिन्हें समझा-बुझाकर सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना ने एक बार फिर महानगर के पुराने इलाकों में स्थित हजारों जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि डेंजरस घोषित होने के बावजूद इस इमारत में निर्माण कार्य की अनुमति किसने दी। विशेषज्ञों की मानें तो मानसून आने से पहले अगर इन जर्जर ढांचों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे हादसे किसी बड़ी जानलेवा त्रासदी में तब्दील हो सकते हैं। फिलहाल, पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और इमारत के शेष हिस्से की स्थिरता की जांच की जा रही है।