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उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो पूरी तरह से डीपफेक और एआई की मदद से तैयार किया गया है
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के बीच वीडियो बम और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस्तेमाल ने सियासी घमासान को एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँचा दिया है। हुमायूं कबीर से जुड़े कथित विवादित वीडियो पर मचे बवाल के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। मुर्शिदाबाद के जंगीपुर में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जनता को आगाह किया कि तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी वीडियो के जरिए झूठ फैलाया जा रहा है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हुमायूं कबीर का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था।
उन्होंने कहा कि आजकल एआई के जरिए फर्जी वीडियो बनाकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे किसी भी जाल में न फंसें और इन पर भरोसा न करें। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल ने एक 19 मिनट का वीडियो जारी कर सनसनीखेज दावा किया। पार्टी का आरोप है कि इस वीडियो में हुमायूं कबीर भाजपा के साथ एक गुप्त समझौते की सौदेबाजी कर रहे हैं। तृणमूल का दावा है कि वीडियो में 1000 करोड़ रुपये की बड़ी डील की बात हो रही है, जिसमें से 200 करोड़ रुपये तत्काल भुगतान करने और बदले में बंगाल में भाजपा के मुख्यमंत्री को समर्थन देने का कथित आश्वासन दिया गया है। तृणमूल ने इस वीडियो को भाजपा की भ्रष्टाचार और जोड़-तोड़ की राजनीति का सबसे बड़ा सबूत करार दिया है। दूसरी ओर, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो पूरी तरह से डीपफेक और एआई की मदद से तैयार किया गया है।
कबीर ने चेतावनी दी है कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए, तो वह तृणमूल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इस मामले में हुमायूं का बचाव करते हुए तकनीकी छेड़छाड़ की आशंका जताई है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कोलकाता में इस मुद्दे पर तीखा तंज कसा था। शाह ने मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह इतनी सक्षम हैं कि ऐसे 2000 फर्जी वीडियो बनवा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हुमायूं और भाजपा की विचारधारा उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव की तरह है, जिनका मिलना नामुमकिन है। इस विवाद में बाबरी मस्जिद से जुड़ी कथित टिप्पणियों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। फिलहाल, इस वीडियो वॉर की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन इसने चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं के बीच चर्चा और संदेह का माहौल जरूर पैदा कर दिया है।