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जांच से ठीक पहले अलीपुर जिला परिषद भवन में भीषण आग
कोलकाता। दक्षिण 24 परगना जिला परिषद के अलीपुर स्थित एक बहुमंजिला सरकारी भवन में बुधवार की सुबह उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब वहां अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों और काले धुएं के गुबारे ने पूरी इमारत को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। इस अग्निकांड ने उस समय एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब यह साफ हुआ कि आग ठीक उसी चौथी मंजिल पर लगी है जहां इलाके के चर्चित कारोबारी और हाल ही में गिरफ्तार हुए जहांगीर खान का निजी कार्यालय स्थित है। इस हैरान करने वाली टाइमिंग की वजह से पूरी घटना के पीछे किसी गहरी साजिश की बू आने लगी है।
चश्मदीदों के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब पौने दस बजे स्थानीय लोगों ने इमारत की ऊपरी मंजिल से अचानक काला धुआं निकलते देखा था। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और चौथी मंजिल से फैलती हुई सीधे सातवीं मंजिल तक जा पहुंची। घटना की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग की कई गाडिय़ों को तुरंत मौके पर रवाना किया गया, जिन्होंने युद्धस्तर पर पानी की बौछारें कर आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कीं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जहांगीर खान हफ्ते में दो दिन इसी दफ्तर में बैठकर अपनी गतिविधियां चलाते थे, और उनकी ताजा गिरफ्तारी के तुरंत बाद इस दफ्तर का स्वाहा होना महज एक इत्तेफाक नहीं लग रहा है।
इस पूरे मामले पर फलता के विधायक देबांशु पांडा ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। विधायक का सीधा दावा है कि यह कोई शॉर्ट-सर्किट या हादसा नहीं है, बल्कि जिला परिषद के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले के दस्तावेजों को राख करने की एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश है। उन्होंने खुलकर कहा कि जहांगीर खान जिला परिषद के निर्माण विभाग के कर्माध्यक्ष रह चुके हैं और उनके राज में टेंडर बांटने के नाम पर भारी कटमनी वसूली और सरकारी खजाने को चूना लगाने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह सामने आया कि इस कथित भ्रष्टाचार को लेकर ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को ही चार बड़ी ठेकेदार कंपनियों ने फलता थाने में जहांगीर खान के खिलाफ लिखित एफआईआर दर्ज कराई थी। विधायक देबांशु पांडा के अनुसार, इस शिकायत के आधार पर बुधवार के ही दिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेष टीम को जिला परिषद दफ्तर पहुंचकर तमाम फाइलों और टेंडर के दस्तावेजों को जब्त कर जांच शुरू करनी थी। लेकिन अधिकारियों के पहुंचने से ऐन पहले पूरी मंजिल का आग की भेंट चढ़ जाना यह साफ इशारा करता है कि भ्रष्टाचार के अकाट्य सबूतों को मिटाने के लिए जानबूझकर माचिस दिखाई गई है।
चूंकि अलीपुर के इस बहुमंजिला सरकारी परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के भी दफ्तर और रिकॉर्ड रूम मौजूद हैं, इसलिए इस आगजनी में कई और संवेदनशील सरकारी फाइलों के जलकर खाक होने की आशंका ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं। हालांकि दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को और आगे बढऩे से रोक दिया, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक आग लगने की असली वजह साफ नहीं की गई है। फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है, लेकिन पुष्पा उर्फ जहांगीर खान की गिरफ्तारी, ठेकेदारों की शिकायत और फिर कुछ ही घंटों के भीतर इस अग्निकांड ने बंगाल की सियासत में एक नया भूचाल ला दिया है।