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उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति तथा वन मंत्री पहले ही अपनी हार को भांप चुके हैं और बचने का रास्ता तलाश रहे हैं
कोलकाता। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में कथित अनियमितताओं के मामले में आरोपित और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सीट बदलने के इच्छुक हैं। जेल में रहने के बाद पहली बार उन्होंने अलग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर की है।
ज्योतिप्रिय मलिक वर्तमान में उत्तर 24 परगना जिले की हाबरा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं। वह इस सीट से वर्ष 2011, 2016, 2021 में लगातार तीन बार निर्वाचित हुए हैं। इससे पहले वह इसी जिले की गायघाटा विधानसभा सीट से वर्ष 2001 और 2006 में विधायक रह चुके हैं।
सोमवार को अलग सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हुए मलिक ने कहा कि उनके लिए विधानसभा क्षेत्र बदलना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि समय की जरूरत के अनुसार मैं पहले गायघाटा से हाबरा आया था। अब एक बार फिर समय की मांग के हिसाब से हाबरा से किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में जाना पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मलिक के इस रुख के पीछे हाबरा सीट के हालिया चुनावी आंकड़े अहम कारण हैं। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वह हाबरा से बेहद कम, महज 3841 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर पाए थे। हाबरा विधानसभा सीट बारासात लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और भी चुनौतीपूर्ण दिखती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बारासात सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को हाबरा विधानसभा से लगभग 20 हजार मतों की बढ़त मिली थी। वहीं वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार हाबरा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 20 हजार मतों से आगे रहा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन आंकड़ों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी चिंता बढ़ा दी है और यही वजह है कि ज्योतिप्रिय मलिक इस बार सुरक्षित सीट की तलाश में हैं।
इस मुद्दे पर भाजपा ने मलिक पर तीखा हमला बोला है। भाजपा की राज्य समिति के सदस्य तापस मित्रा ने कहा कि हाबरा से चुनाव न लड़ने की इच्छा दरअसल संभावित हार के डर का संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति तथा वन मंत्री पहले ही अपनी हार को भांप चुके हैं और बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
मित्रा ने कहा कि वह जहां से भी चुनाव लड़ेंगे, जनता उन्हें नकार देगी। राशन वितरण में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जेल जा चुके नेता को लोग दोबारा स्वीकार नहीं करेंगे। इस बार तृणमूल कांग्रेस की सत्ता से विदाई तय है।