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हटाई गई लियोनेल मेसी की 70 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा

सिर्फ प्रतिमा ही नहीं, बल्कि खुद मेसी का वह कोलकाता दौरा भी विवादों और हंगामे से अछूता नहीं रहा था

01 Jun 2026

हटाई गई लियोनेल मेसी की 70 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा

कोलकाता। लेकटाउन इलाका सोमवार को एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना, जब विश्व फुटबॉल के महानायक लियोनेल मेसी की 70 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा को आखिरकार उसके मुख्य मंच से हटा दिया गया। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की एक विशेष टीम ने बेहद कड़े सुरक्षा इंतजामों और भारी-भरकम हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से इस विशालकाय प्रतिमा को नीचे उतारा और एक बड़े ट्रक पर लादकर विदा कर दिया। फिलहाल इस ऐतिहासिक प्रतिमा को पीडब्ल्यूडी की कड़ी निगरानी में सुरक्षित रखवाया गया है, लेकिन भविष्य में खेल प्रेमियों को मेसी की यह जादुई झलक कहाँ देखने को मिलेगी, इस पर राज्य सरकार की ओर से अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है। 
भीतरी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों की मानें तो इस प्रतिमा को आने वाले दिनों में कोलकाता के प्रसिद्ध रवींद्र सरोवर या फिर राजरहाट के न्यू टाउन स्थित मशहूर इको पार्क में दोबारा स्थापित किया जा सकता है, मगर इस पर आखिरी और निर्णायक फैसला पूरी तरह राज्य सरकार के पाले में है। पीडब्ल्यूडी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर सूर्यकांत गिरि ने इस पूरी तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि यह विशालकाय प्रतिमा लोहे के एक बेहद मजबूत आंतरिक ऊंचे फ्रेम पर भारी-भरकम स्क्रू के सहारे टिकी हुई थी। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने बेहद सावधानी से एक-एक कर सभी स्क्रू को खोला और बिना किसी नुकसान या तकनीकी बाधा के इसे पूरी सुरक्षा के साथ सड़क पर उतारकर वाहन में लोड कर दिया। 
इस पूरे ऑपरेशन के दौरान राज्य की शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने खुद विशेष और कड़े निर्देश जारी किए थे। उन्होंने विभाग को साफ लफ्जों में हिदायत दी थी कि दुनिया के इस महान फुटबॉलर की प्रतिमा को हटाते वक्त उसकी बनावट या रंग-रूप को जरा सी भी खरोंच या नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। विभाग ने भी ठीक इसी आदेश का पालन करते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ इस काम को अंजाम दिया। दरअसल, इस प्रतिमा को हटाने की नौबत हाल ही में आए खराब मौसम और तेज आंधी-तूफान की वजह से आई। कुछ दिनों पहले स्थानीय निवासियों और वहां से गुजरने वाले राहगीरों ने गौर किया कि तेज हवाओं के थपेड़ों के कारण यह 70 फीट ऊंची प्रतिमा अपनी जगह पर खतरनाक ढंग से हिल रही है। इसकी सूचना तुरंत लेकटाउन थाने को दी गई, जिसने फौरन पीडब्ल्यूडी विभाग को अलर्ट किया। मौके पर पहुंचे पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार प्रवीर पाल ने बारीकी से जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि प्रतिमा के फाउंडेशन बोल्ट में गंभीर तकनीकी खराबी आ चुकी है, जिससे इसका आधार कमजोर हो गया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यह प्रतिमा बेहद जोखिमभरी स्थिति में है और किसी भी वक्त सड़क पर गिरकर बड़े हादसे को दावत दे सकती है, जिसके बाद इसे तुरंत हटाने की आपात सिफारिश की गई। 
गौरतलब है कि यह विशालकाय प्रतिमा वीआईपी रोड को पार करने के लिए राहगीरों के वास्ते बनाए गए भूमिगत पैदल मार्ग (अंडरपास) के ठीक ऊपर शान से खड़ी थी। दिसंबर 2025 में जब लियोनेल मेसी खुद कोलकाता के दौरे पर आए थे, तब उन्होंने स्वयं रिमोट का बटन दबाकर बड़े ही भव्य अंदाज में अपनी इस गगनचुंबी प्रतिमा का अनावरण किया था। उस वक्त इस प्रतिमा की ऊंचाई और इसकी कारीगरी ने पूरी दुनिया के खेल जगत में सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, यह पूरी परियोजना अपने शुरुआती दिनों से ही लगातार तीखे विवादों और कानूनी पचड़ों में घिरी रही। इसकी स्थापना को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में बकायदा एक मुकदमा भी दायर किया गया था, जिसमें यह गंभीर सवाल उठाया गया था कि क्या इतनी बड़ी प्रतिमा का निर्माण किसी सरकारी जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे राज्य के तत्कालीन कद्दावर मंत्री सुजीत बोस का दिमाग और मुख्य भूमिका मानी जाती रही है, जो कि इन दिनों शिक्षक भर्ती घोटाले के गंभीर आरोपों में पुलिस की गिरफ्त में हैं। 
सिर्फ प्रतिमा ही नहीं, बल्कि खुद मेसी का वह कोलकाता दौरा भी विवादों और हंगामे से अछूता नहीं रहा था। उनके दीदार के लिए बंगाल और देशभर के हजारों फुटबॉल प्रेमियों ने अपनी जेबें ढीली कर सॉल्टलेक स्टेडियम के बेहद महंगे टिकट खरीदे थे। लेकिन बदइंतजामी और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर मेसी को महज 16 मिनट के भीतर ही मैदान से बाहर ले जाया गया। गैलरियों में बैठे हजारों फैंस मेसी की एक ठीक से झलक तक नहीं पा सके, जिससे नाराज होकर उग्र भीड़ ने स्टेडियम में जमकर तोडफ़ोड़ की, कुर्सियां तोड़ीं और मैदान पर बोतलें फेंकी थीं। इस पूरे तमाशे के खिलाफ बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर हुई थी। अब जब यह विवादित और ऐतिहासिक प्रतिमा अपने पुराने ठिकाने से हटाई जा चुकी है, तो खेल प्रेमियों के बीच बस यही एक सवाल तैर रहा है कि मेसी का नया आशियाना कोलकाता का कौन सा कोना बनेगा।

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