तारातला हादसे में पूर्व मेयर फिरहाद एवं दो पार्षदों के नाम शिकायत दर्ज; मरने वालों की संख्या हुई 17
अब सीवीसी नियमों से होंगे सरकारी ठेके, शुभेंदु कैबिनेट का बड़ा फैसला
कोलकाता। बंगाल की नई भाजपा सरकार ने राज्य में दशकों से चली आ रही टेंडर और सरकारी खरीद प्रक्रिया के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कटमनी और कमीशनखोरी के तंत्र को ध्वस्त करने के लिए एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य के सभी सरकारी विभागों, संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) में किसी भी प्रकार की सरकारी खरीद, ठेकेदारी और सेवाओं के चयन में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की गाइडलाइन को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
राज्य के वित्त विभाग की ओर से इस सप्ताह जारी एक महत्वपूर्ण अधिसूचना में साफ कहा गया है कि सामान की खरीदारी से लेकर किसी भी बड़ी सरकारी परियोजना का ठेका देने तक, अब सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। गौरतलब है कि अब तक बंगाल में इन सभी प्रशासनिक कार्यों के लिए राज्य सरकार के अपने वित्तीय नियम (वेस्ट बंगाल फाइनेंशियल रूल्स) लागू होते थे, जिसका फायदा उठाकर अक्सर वित्तीय गड़बडिय़ों को अंजाम देने के आरोप लगते थे।
प्रशासनिक मुख्यालय नवान्न के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी परियोजनाओं, टेंडरों के आवंटन और खरीद प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर कटमनी, भाई-भतीजावाद और भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहे थे। विपक्ष में रहते हुए खुद शुभेंदु अधिकारी ने इन मुद्दों पर जोरदार आवाज उठाई थी। अब मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही उन्होंने महज 15 दिनों के भीतर इस कड़े सुधार को अमलीजामा पहना दिया है।
वित्त सचिव प्रभात मिश्रा के हस्ताक्षर वाले इस आधिकारिक आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि मौजूदा वित्तीय नियमों के साथ-साथ अब सीवीसी की सभी गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से जमीन पर लागू किया जाए। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार की इस सतर्कता नियमावली के लागू होने से टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी हो जाएगी, जिससे किसी चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने या अधिकारियों द्वारा पक्षपात किए जाने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत उठाया गया यह कदम भविष्य में सरकारी खजाने की लूट को रोकने और विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता को सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।