राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ
फिलहाल, कबीर के इन दावों ने बंगाल के चुनावी समर को और भी दिलचस्प बना दिया है
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। तृणमूल से निलंबित विधायक और नवनिर्मित आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूँ कबीर ने गुरुवार को मालदा में एक बड़ा राजनीतिक धमाका किया। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में न तो तृणमूल और न ही भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा। कबीर ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनकी पार्टी 100 से अधिक सीटें जीतकर राज्य की सत्ता में किंगमेकर की भूमिका निभाएगी और वे खुद राज्य के उप-मुख्यमंत्री पद का दावा करेंगे। राजनीतिक दावों के साथ-साथ हुमायूँ ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए। मालदा जिला प्रशासन के कार्यालय में डेप्युटेशन सौंपने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में भारी विसंगतियां हैं। कबीर के अनुसार, लगभग 30' योग्य मतदाताओं के नाम मुख्य सूची से गायब हैं या उन्हें अडजुडिकेशन सूची में डाल दिया गया है।
उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इन नामों को तुरंत बहाल नहीं किया गया, तो वे इस मामले को ट्रिब्यूनल और जरूरत पडऩे पर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। गठबंधन के समीकरणों को स्पष्ट करते हुए हुमायूँ ने कहा कि उनकी पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ चुनाव लड़ेगी। उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी का असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ चुनावी तालमेल होगा, लेकिन उन्होंने कांग्रेस, सीपीएम और आईएसएफ के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। कबीर ने कहा कि हम अपने एजेंडे पर किसी से समझौता नहीं करेंगे। बंगाल की जनता अब एक नया विकल्प चाहती है और हम वही विकल्प प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बंगाल में इस बार कोई भी दल अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगा। सत्ता की चाबी हमारे पास होगी और हम जनता के अधिकारों के लिए उप-मुख्यमंत्री के पद पर बैठकर शासन करेंगे। हुमायूँ का यह बयान विशेष रूप से मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कबीर और मिम का गठबंधन अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगाने में सफल रहता है, तो इसका सीधा नुकसान सत्ताधारी दल को और फायदा भाजपा को हो सकता है। फिलहाल, कबीर के इन दावों ने बंगाल के चुनावी समर को और भी दिलचस्प बना दिया है।