तारातला हादसे में पूर्व मेयर फिरहाद एवं दो पार्षदों के नाम शिकायत दर्ज; मरने वालों की संख्या हुई 17
गौरतलब है कि चुनावी झटके के बाद से ही ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी लगातार कालीघाट में हारे और जीते हुए उम्मीदवारों के साथ मंथन कर रहे हैं
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल के भीतर छिड़ा अंतर्विरोध अब खुलकर सतह पर आने लगा है। बुधवार को विधानसभा परिसर में आयोजित पार्टी के एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। दरअसल, इस प्रदर्शन में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से केवल 34 विधायक ही शामिल हुए, जबकि 46 विधायकों ने इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना ली। विधानसभा में आधे से अधिक विधायकों की यह सामूहिक अनुपस्थिति ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब पार्टी पहले से ही भीतरघात और हार के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही है। इस घटना ने तृणमूल खेमे में संभावित बगावत और बड़ी टूट की अटकलों को एक बार फिर हवा दे दी है।
पार्टी नेतृत्व ने हॉकरों के खिलाफ चल रहे प्रशासनिक अभियान और चुनाव के बाद कार्यकर्ताओं पर दर्ज हो रहे मुकदमों के विरोध में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे इस धरने का आयोजन किया था। नेतृत्व की तरफ से सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से इसमें शामिल होने का कड़ा निर्देश जारी किया गया था। इसके बावजूद आधे से ज्यादा विधायकों का नदारद रहना यह साफ संकेत दे रहा है कि जमीनी स्तर पर नेताओं में भारी असंतोष और बेचैनी है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठतम विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने संगठन में किसी भी तरह की दरार की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि चुनाव के बाद हमारे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं, जिन्हें संभालने में कई विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग व्यावहारिक वजहों से नेता नहीं आ पाए, लेकिन पूरी पार्टी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पीछे एकजुट खड़ी है और बिखरने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
बेलघरिया से तृणमूल के तेजतर्रार विधायक कुणाल घोष ने भी विपक्ष के दावों पर पलटवार करते हुए एकजुटता का राग अलापा। उन्होंने कहा कि कालीघाट की संगठनात्मक बैठक में जो भी लोग मौजूद थे, वे सभी आज भी यहां एकजुट दिखे हैं, इसलिए विरोधियों को इसमें कोई सियासी फायदा नहीं ढूंढना चाहिए।
गौरतलब है कि चुनावी झटके के बाद से ही ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी लगातार कालीघाट में हारे और जीते हुए उम्मीदवारों के साथ मंथन कर रहे हैं। हाल ही में हुई एक आंतरिक बैठक में ममता बनर्जी ने बेहद कड़े लहजे में नेताओं से यहां तक कह दिया था कि जो लोग जाना चाहते हैं, वे स्वतंत्र हैं और पार्टी छोड़ सकते हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर 46 विधायकों का इस तरह गायब होना यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, और आने वाले दिन तृणमूल के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।