120 साल पुरानी ऐतिहासिक बेकरी 'नाहूम एंड सन्स' के शटर गिरे
कोलकाता। महानगर के दिल न्यू मार्केट की पहचान और कोलकाता के जायके का पर्याय मानी जाने वाली 120 साल पुरानी ऐतिहासिक यहूदी बेकरी नाहूम एंड सन्स को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शहर की इस विरासत पर अस्थायी रूप से ताला लटक गया है, जिसने न सिर्फ बेकरी के शौकीनों को मायूस किया है बल्कि वैश्विक संकट के स्थानीय असर की एक डरावनी तस्वीर भी पेश की है। साल 1902 में स्थापित यह दुकान, जिसने विश्व युद्धों से लेकर भारत की आजादी तक का दौर देखा, आज पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और उसके चलते उपजे कमर्शियल एलपीजी (गैस) के भारी संकट के कारण अपने ओवन बंद करने पर मजबूर हो गई है। यह महज एक दुकान का बंद होना नहीं है, बल्कि कोलकाता के फूड कल्चर के एक जीवंत अध्याय का थम जाना है। बेकरी प्रबंधन द्वारा दुकान के बाहर चस्पा किए गए एक आधिकारिक नोटिस ने शनिवार सुबह से ही ग्राहकों के बीच खलबली मचा दी है। इस नोटिस के अनुसार, व्यावसायिक एलपीजी की भारी किल्लत के चलते उत्पादन जारी रखना असंभव हो गया है, जिसके कारण 18 मार्च से 22 मार्च 2026 तक बेकरी को पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है।
जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा और कड़ा प्रहार भारत के कमर्शियल सेक्टर पर पड़ा है। गैस की इस अनिश्चित आपूर्ति ने नाहूम जैसी पारंपरिक बेकरी के सामने कच्चा माल तैयार करने की एक ऐसी चुनौती खड़ी कर दी, जिसका समाधान फिलहाल शटर गिराने के अलावा और कुछ नहीं सूझा। नाहूम एंड सन्स का इतिहास बताता है कि इस बेकरी के कपाट शायद ही कभी बंद हुए हों। पिछले एक सदी से भी अधिक समय में यह दुकान केवल 2013 में अपने मालिक के निधन के समय और कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान लगे सख्त लॉकडाउन में ही बंद देखी गई थी। यही वजह है कि गैस की कमी के चलते इसका बंद होना शहर के बुद्धिजीवियों और विरासत प्रेमियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। न्यू मार्केट आने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों के लिए नाहूम के प्लम केक, ब्राउनी और लेमन टार्ट सिर्फ पकवान नहीं बल्कि एक परंपरा का हिस्सा रहे हैं, जो अब कम से कम पांच दिनों के लिए बाजार से नदारद रहेंगे। प्रबंधन ने उम्मीद जताई है कि 23 मार्च से बेकरी दोबारा अपनी पुरानी रंगत में लौट आएगी, बशर्ते गैस की आपूर्ति सामान्य हो जाए। हालांकि, यह घटना इस बात का कड़ा संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही जंग की लपटें अब हमारे शहर के चूल्हों और विरासतों तक पहुँचने लगी हैं।
फिलहाल, न्यू मार्केट के उस कोने में सन्नाटा पसरा है जहाँ से कभी ताजी बेक की गई ब्रेड और कुकीज की खुशबू आती थी। अब सबकी नजरें 23 मार्च पर टिकी हैं, जब यह ऐतिहासिक भ_ी एक बार फिर दहकने की उम्मीद है।