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'संजय बहुत कुछ जानता है'
कोलकाता। वर्ष 2024 के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म और हत्या मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजाशेखर मान्था और न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने सीबीआई को इस मामले में सजायाफ्ता मुख्य आरोपी संजय राय से दोबारा पूछताछ करने की खुली छूट दे दी है। अदालत की इस टिप्पणी ने राज्य की राजनीति और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है कि ऐसा लगता है कि संजय राय बहुत कुछ जानता है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मान्था ने स्पष्ट किया कि सीबीआई को जांच की दिशा तय करने में किसी भी संकोच की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि एजेंसी को लगता है कि संजय राय के बयानों में और भी राज छिपे हैं, तो उससे फिर से पूछताछ की जाए। इसके साथ ही, अदालत ने इस संवेदनशील मामले में आधुनिक तकनीक और उन्नत फोरेंसिक संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया। खंडपीठ ने खडग़पुर आईआईटी के एक छात्र की संदिग्ध मौत के मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे फोरेंसिक जांच की बारीकियां पूरे केस की दिशा बदल सकती हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रुख पर भी कड़े सवाल उठाए। न्यायमूर्ति मान्था ने पूछा कि यदि मृतका का परिवार घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण करना चाहता है और इस पर सीबीआई को कोई आपत्ति नहीं है, तो राज्य सरकार को इसमें बाधा क्यों डालनी चाहिए?
अदालत ने टिप्पणी की कि जब मामला पहले ही केंद्रीय एजेंसी के पास है, तो राज्य की ओर से ऐसी आपत्तियों का उठना कई सवाल खड़े करता है। मृतका के माता-पिता की ओर से अदालत में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए गए हैं, जिनमें डीएनए प्रोफाइल और कुछ महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। अदालत ने इन साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई को निर्देश दिया है कि इनकी गहनता से जांच की जाए और अगली सुनवाई तक एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
परिवार का शुरू से ही आरोप रहा है कि इस अपराध में संजय राय अकेला नहीं था और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान आरजी कर का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। हाल ही में मृतका की मां, जो अब भाजपा की उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं, ने भी इस मामले में न्याय की धीमी गति और बड़े चेहरों को बचाने के आरोपों को लेकर तीखे बयान दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 मई को तय की है। कानून के जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस ताजा निर्देश के बाद सीबीआई अन्य संदिग्धों और अस्पताल के तत्कालीन अधिकारियों पर शिकंजा कस सकती है, जिससे इस जघन्य कांड के पीछे की कथित बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो सके।