राज्यपाल के फैसले पर टिकी निगाहें, दिसंबर में होगी वोटिंग
हावड़ा। हावड़ा नगर निगम में पिछले सात वर्षों से जारी चुनावी वनवास अब समाप्त होने की उम्मीद जगी है। राज्य विधानसभा द्वारा शनिवार को हावड़ा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए जाने के बाद अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं। यदि राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस इस विधेयक पर अपनी मुहर लगा देते हैं, तो हावड़ा में वार्डों के पुनर्गठन और नए सिरे से चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
संभावना जताई जा रही है कि सब कुछ ठीक रहा तो हावड़ा नगर निगम के चुनाव इसी वर्ष दिसंबर में कोलकाता नगर निगम चुनाव के साथ आयोजित किए जा सकते हैं। 66 वार्डों का होगा नया स्वरूप विधेयक के अनुसार, हावड़ा नगर निगम में वार्डों की संख्या अब 50 से बढ़ाकर 66 कर दी जाएगी। दरअसल, साल 2015 में बाली नगर पालिका को हावड़ा में मिलाया गया था, लेकिन प्रशासनिक जटिलताओं के कारण 2021 में इसे पुन: अलग करने का निर्णय लिया गया। अब इस नए संशोधन के जरिए उन 16 वार्डों को लेकर जारी कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने का प्रयास किया गया है।
राज्य के नगर विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्यपाल की अनुमति मिलते ही सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव है मतदान हालांकि, तकनीकी रूप से तैयारियां तेज हैं, लेकिन राजनीतिक समीकरण अलग कहानी बयां कर रहे हैं। राज्य में मई 2026 तक विधानसभा चुनाव होने हैं और मार्च के प्रथम सप्ताह में चुनावी तारीखों के एलान की संभावना है। ऐसे में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण हावड़ा नगर निगम का चुनाव नई सरकार के गठन के बाद ही संभव हो पाएगा।
विभाग का लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक तमाम तैयारियों को पूरा कर लिया जाए ताकि कोलकाता के साथ ही हावड़ा में भी मतदान कराया जा सके। 13 साल से है जनता को इंतजार हावड़ा नगर निगम में अंतिम बार चुनाव वर्ष 2013 में हुए थे। 2018 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद से ही यहां निर्वाचित बोर्ड के बजाय प्रशासक मंडल कार्य कर रहा है। परिसीमन और बाली नगर पालिका के विलय-विच्छेद के कानूनी दांव-पेचों के कारण यहां की जनता लंबे समय से अपने मताधिकार से वंचित है। स्थानीय निवासियों और विपक्षी दलों ने भी मांग की है कि इस लोकतांत्रिक शून्य को जल्द से जल्द भरा जाए ताकि नागरिक सेवाओं में सुधार हो सके।