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तृणमूल और वाम समर्थकों में खूनी झड़प, रणक्षेत्र बना डीएम ऑफिस
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के लिए जारी नामांकन प्रक्रिया के बीच सोमवार को हावड़ा जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय के बाहर लोकतंत्र की मर्यादा तार-तार हो गई। नामांकन दाखिल करने पहुंचे तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चा के समर्थकों के बीच जमकर संघर्ष हुआ, जिससे पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। धक्का-मुक्की, तीखी नारेबाजी और हाथापाई के बीच स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि पुलिस को बीच-बचाव के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। आरोप है कि इस झड़प के दौरान महिला समर्थकों के साथ भी अभद्रता की गई, जिससे चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तनाव उस समय शुरू हुआ जब वामपंथी समर्थकों की एक रैली डीएम कार्यालय के समीप पहुंची। पुलिस ने जैसे ही सुरक्षा कारणों से रैली को रोका, प्रदर्शनकारियों ने चोर-चोर के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते विरोध का स्वर तीखा हो गया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। वहां मौजूद तृणमूल समर्थकों ने जब इसका कड़ा विरोध किया, तो दोनों गुट आमने-सामने आ गए। डोमजूर की तृणमूल समर्थक पूर्णिमा आइच ने आरोप लगाया कि वाम कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की की और बिना किसी उकसावे के हमलावर हो गए।
दूसरी ओर, हावड़ा सिटी पुलिस ने आधिकारिक बयान में कहा कि नामांकन केंद्र के भीतर प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया गया। हालांकि, दफ्तर के बाहर की सड़कों पर मचे बवाल ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी दिन कोलकाता के अलीपुर में भी नामांकन को लेकर भारी गहमागहमी देखी गई, जहां भाजपा उम्मीदवार पापिया अधिकारी के नामांकन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं में तीखी बहस हुई। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आ रही हिंसा और टकराव की ये खबरें संकेत दे रही हैं कि 2026 की यह चुनावी जंग आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप ले सकती है।