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ममता की मौजूदगी में 300 समर्थकों ने थमा तृणमूल का दामन
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े सियासी मैदान में पाला बदलने का खेल तेज हो गया है। इसी क्रम में पूर्व तृणमूल नेता हुमायूं कबीर की आमजनता उन्नयन पार्टी को अपने ही गढ़ में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।
सोमवार को पूर्वस्थली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनसभा के दौरान एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ, जहाँ हुमायूं कबीर की पार्टी के करीब 300 सक्रिय कार्यकर्ताओं और नेताओं ने सामूहिक रूप से तृणमूल की सदस्यता ग्रहण कर ली। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए इस दलबदल ने जिले में कबीर की चुनावी तैयारियों को बड़ा आघात पहुँचाया है। इस टूट का मुख्य केंद्र आमजनता उन्नयन पार्टी का जिला नेतृत्व रहा। पार्टी के पूर्व बर्धमान जिला अध्यक्ष पंकज गांगोपाध्याय ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ मंच पर पहुँचकर तृणमूल का झंडा थाम लिया। तृणमूल नेतृत्व ने इस घटनाक्रम को अपनी सांगठिनक मजबूती के प्रमाण के तौर पर पेश किया है।
गौरतलब है कि हुमायूं को कुछ समय पहले धार्मिक मुद्दों पर विवादित बयानबाजी और अनुशासनहीनता के चलते ममता बनर्जी ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद कबीर ने अपनी नई पार्टी बनाकर राज्य की 182 सीटों पर चुनाव लडऩे और तृणमूल को सत्ता से बेदखल करने की हुंकार भरी थी, लेकिन चुनाव से ऐन पहले उनके सेनापतियों का साथ छोडऩा उनकी रणनीति पर भारी पड़ता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुमायूं कबीर ने ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन कर मुस्लिम बहुल सीटों पर जो समीकरण बिठाने की कोशिश की थी, इस दलबदल ने उस पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मुख्यमंत्री की सभा में जाकर दोबारा तृणमूल से जुडऩा यह संकेत देता है कि हुमायूं कबीर का धार्मिक कार्ड शायद उनके अपने ही समर्थकों को रास नहीं आ रहा है।
पूर्व बर्धमान जैसे महत्वपूर्ण जिले में इस सेंधमारी ने हुमायूं कबीर के लिए आगामी चुनाव की राह और भी मुश्किल कर दी है, जबकि ममता बनर्जी ने एक बार फिर साबित किया है कि पार्टी से अलग होने वाले नेताओं के आधार को वे बखूबी ध्वस्त करना जानती हैं।