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अगर हताशा का कोई चेहरा होता, तो वह ममता बनर्जी का होता : अमित मालवीय

भाजपा नेता ने कहा कि इसका नतीजा शासन का ठहराव है, जिसकी कीमत बंगाल की जनता चुका रही है

04 Feb 2026

अगर हताशा का कोई चेहरा होता, तो वह ममता बनर्जी का होता : अमित मालवीय

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को जोरदार हमला बोला। भाजपा ने दावा किया कि एसआईआर को लेकर मुख्यमंत्री की घबराहट यह साबित करती है कि वह अब “हताशा का चेहरा” बन चुकी हैं।
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि अगर हताशा का कोई चेहरा होता, तो वह ममता बनर्जी का होता। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अच्छी तरह जानती हैं कि उनके लगातार चुनावी जनादेश अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मतों पर निर्भर रहे हैं, जिनके साथ-साथ फर्जी और अयोग्य नामों को कथित तौर पर जिलाधिकारियों, उप-जिलाधिकारियों और बूथ लेवल ऑफिसरों के जरिए मतदाता सूची में जोड़ा गया।
अमित मालवीय के अनुसार, मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया से मुख्यमंत्री इसलिए विचलित हैं क्योंकि इससे पश्चिम बंगाल में वर्षों से तैयार और संरक्षित किए गए उनके “वोट इकोसिस्टम” के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि मुख्यमंत्री पिछले दो दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और राजनीतिक नाटक तथा “निर्मित आक्रोश” में लिप्त हैं।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि पूरे देश में तृणमूल कांग्रेस ही एकमात्र राजनीतिक दल है जो इस संशोधन प्रक्रिया का विरोध कर रहा है, जबकि यही प्रक्रिया 11 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी समानांतर रूप से चल रही है, जिनमें विपक्ष-शासित तमिलनाडु भी शामिल है।
अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को न तो संस्थानों के प्रति सम्मान है और न ही संघीय ढांचे के प्रति। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नियम-कायदों को असुविधा और संवैधानिक ढांचे को बाधा के रूप में देखती हैं। उनके अनुसार, ममता बनर्जी का कार्यकाल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि लगभग हर हितधारक के साथ लगातार टकराव से चिह्नित रहा है।
भाजपा नेता ने कहा कि इसका नतीजा शासन का ठहराव है, जिसकी कीमत बंगाल की जनता चुका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नाटकों के चलते राज्य के लोगों को विकास और स्थिरता से वंचित रखा जा रहा है।
इस बीच, एसआईआर के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष बुधवार को अहम सुनवाई होनी है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किए गए एक पोस्ट के बाद इस बात की अटकलें भी तेज हो गई थीं कि सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं अपने तर्क पेश कर सकती हैं।

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