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होर्मुज की नाकाबंदी का असर, ईरान का रुख पड़ा नरम, अमेरिका भी पसीजा, परसों शुरू हो सकती है बातचीत

उन्होंने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकाबंदी का ऐलान कर धमकी दी कि अगर इस क्षेत्र में कोई भी ईरानी जहाज पास आया तो उसे समुद्र में डुबो दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिद पर अड़े ईरान का रुख नरम पड़ा है। इससे ट्रंप भी खुश हैं। अब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच परसों (गुरुवार) बातचीत हो सकती है।

14 Apr 2026

होर्मुज की नाकाबंदी का असर, ईरान का रुख पड़ा नरम, अमेरिका भी पसीजा, परसों शुरू हो सकती है बातचीत

वाशिंगटन। अमेरिकी नौसेना की होर्मुज जलडमरूमध्य समेत ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकाबंदी का असर दिखने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष विराम के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा फैसला लिया। उन्होंने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकाबंदी का ऐलान कर धमकी दी कि अगर इस क्षेत्र में कोई भी ईरानी जहाज पास आया तो उसे समुद्र में डुबो दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिद पर अड़े ईरान का रुख नरम पड़ा है। इससे ट्रंप भी खुश हैं। अब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच परसों (गुरुवार) बातचीत हो सकती है।

अल जजीरा और फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत करने की उत्सुकता जताई है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि गेंद ईरान के पाले में है। अब निश्चिततौर पर को बड़ा समझौता हो सकता है। इस्लामाबाद में अमेरिका ने ईरान को 20 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया था। इसके जवाब में सोमवार को ईरान ने एक जवाबी प्रस्ताव दिया। इसमें उसने कहा कि 20 साल नहीं, बल्कि पांच साल का प्रस्ताव वह मानने को तैयार है।

अमेरिकी नाकाबंदी अगर जारी रही तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसलिए मध्यस्थ देशों ने फिर कोशिश शुरू कर दी है। मध्यस्थ देशों में से एक के राजनयिक ने कहा कि संघर्ष विराम के दौरान देनों देशों के बीच बातचीत गुरुवार को फिर शुरू हो सकती है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बातचीत का मकसद 21 अप्रैल को संघर्ष विराम खत्म होने से पहले सुलह कराना है। इस राजनयिक ने बताया कि तेहरान और वांशिंगटन बातचीत करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। मगर यह साफ नहीं है कि बातचीत में उसी स्तर का प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा या नहीं। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान को फिर संभावित मेजबान के तौर पर विचाराधीन रखा गया है, जबकि जिनेवा के नाम पर भी चर्चा चल रही है।

उपराष्ट्रपति वेंस ने सोमवार को कहा कि इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत खत्म होने के बाद से गेंद ईरान के पाले में है। अगला कदम अब तेहरान को उठाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत से इसलिए हटा, क्योंकि ईरानी वार्ताकारों के पास किसी समझौते को अंतिम रूप देने का अधिकार नहीं था। अब कोई भी प्रगति तेहरान के नेतृत्व की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

वेंस ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ सामान्य रिश्ते रखने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ईरान के साथ एक सामान्य देश जैसा बर्ताव हो, अगर उसकी अर्थव्यवस्था सामान्य हो और अगर उसके लोग खुशहाल और समृद्ध हो सकें, तो उन्हें बहुत खुशी होगी।" ट्रंप ने यह भी कहा, " ईरान को सामान्य देश बनने के लिे परमाणु हथियार बनाने का ख्वाब त्यागना होगा।" उधर, ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने मंगलवार को वाशिंगटन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने कहा कि ईरान में संघर्ष विराम को जारी रखना बेहद जरूरी है।

रूस ने भी इस मामले में दिलचस्पी दिखाई है। क्रेमलिन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के साथ संभावित समझौते के हिस्से के तौर पर ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को स्वीकार करने का रूस का प्रस्ताव अभी भी खुला है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "यह प्रस्ताव राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका और क्षेत्रीय देशों, दोनों के साथ बातचीत में रखा था। यह प्रस्ताव अभी भी कायम है, लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।"

खबर यह भी है कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और लेबनान में अमेरिकी राजदूत मंगलवार को वाशिंगटन में इजराइली और लेबनानी राजदूतों के साथ बातचीत के लिए मिलने वाले हैं। विदेश विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि यह 1993 के बाद से इजराइल और लेबनान के बीच इस तरह की पहली बैठक होगी। हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका - इजराइल के हमलों के बाद हिजबुल्लाह ने ईरान का साथ देते हुए इजराइल पर मिसाइल हमले किए हैं। अधिकारी ने यह भी पुष्टि की कि विदेश विभाग के काउंसलर माइकल नीधम इन चर्चाओं में शामिल होंगे।
 

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