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अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा, भारत संघर्ष की बजाय कूटनीति का समर्थक

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह संघर्ष के बजाय बातचीत और कूटनीति का समर्थक है। भारत सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान, विश्वसनीय सप्लाई चेन और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर जोर देता है।

24 May 2026

अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा, भारत संघर्ष की बजाय कूटनीति का समर्थक

नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह संघर्ष के बजाय बातचीत और कूटनीति का समर्थक है। भारत सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान, विश्वसनीय सप्लाई चेन और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर जोर देता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत संसाधनों और बाजार हिस्सेदारी को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो के बीच रविवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। इसमें भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी 140 अरब की आबादी की ऊर्जा जरूरत के प्रति समर्पित है और विविध स्रोतों से किफायती ईंधन खरीदने का पक्षधर है। साथ ही वैश्विक संघर्षों के बीच रक्षा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में ‘मेक इन इंडिया’ की नीति को विशेष महत्व देता है।

जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी पक्ष की भारत के साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच पश्चिम एशिया, पूर्वी एशिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर विचार-विमर्श हुआ है। जयशंकर ने दोनों देशों के बीच जल्द अंतरिम व्यापार समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे आगे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर सहयोग, दुर्लभ खनिज और एआई क्षेत्र में भी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि पिछले एक वर्ष में अमेरिका से भारत के ऊर्जा आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्रोत जरूरी हैं और अमेरिका भारत के लिए विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लोगों के आपसी संबंध साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने वैध यात्रियों के लिए वीजा प्रक्रिया आसान बनाए रखने पर जोर दिया। जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई और 26/11 हमले के प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण पर अमेरिका के सहयोग की सराहना की।

जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिका, इजराइल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए है। भारत क्षेत्रीय संबंधों को ‘जीरो-सम’ की दृष्टि से नहीं देखता और सभी साझेदारियों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।

वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों की गति बरकरार है। भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और दोनों लोकतांत्रिक देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का किसी अन्य देश के साथ संबंध भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत उन्नत तकनीकी क्षमताओं वाला महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। दोनों लोकतांत्रिक देश 21वीं सदी की अत्याधुनिक तकनीकों, वैश्विक नवाचार और साझा राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हॉर्मूज जलडमरूमध्य और ईरान को लेकर जल्द ही कोई शुभ समाचार आने वाला है। खाड़ी क्षेत्र के साझेदार देशों के साथ पिछले 48 घंटों में सकारात्मक प्रगति हुई है। ईरान मुद्दे पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, हालांकि अंतिम समाधान अभी बाकी है। अमेरिका का उद्देश्य है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न करे। होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने व्यावसायिक जहाजों को धमकी देने को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया।

मार्को रुबियो ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि हर देश में कुछ लोग आपत्तिजनक बातें करते हैं, लेकिन अमेरिका एक स्वागत करने वाला देश है, जिसे दुनियाभर से आए लोगों ने समृद्ध बनाया है।

रुबियो ने कहा कि जे-1, एफ-1 और एच-1बी वीजा नियमों में बदलाव भारत विशेष नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर लागू सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने भारतीय कंपनियों के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक निवेश की सराहना की। रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपनी आव्रजन प्रणाली को आधुनिक और अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने माना कि बदलाव के इस दौर में कुछ अस्थायी कठिनाइयां और व्यवधान सामने आ सकते हैं।

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