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भारत, न्यूजीलैंड ने एफटीए पर किए हस्ताक्षर, 100 फीसदी भारतीय निर्यात टैक्स-फ्री

पीयूष गोयल ने एक्स पोस्ट में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने आज एक मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है। इस समझौते पर न्यूजीलैंड के दौरे पर आए व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

27 Apr 2026

भारत, न्यूजीलैंड ने एफटीए पर किए हस्ताक्षर, 100 फीसदी भारतीय निर्यात टैक्स-फ्री

नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर सोमवार को हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

पीयूष गोयल ने एक्स पोस्ट में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने आज एक मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है। इस समझौते पर न्यूजीलैंड के दौरे पर आए व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच नई दिल्ली में हुए इस ऐतिहासिक समझौते का उद्देश्य द्विवार्षिक व्यापार को पांच वर्षों में दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि भारतीय पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। इस समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के काफी मजबूत होने की उम्मीद है।

यह एफटीए भारत के 100 फीसदी निर्यात को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है। इसमें सभी टैरिफ लाइन यानी उत्पाद श्रेणियां शामिल हैं। इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, मोटर वाहन एवं उसके कलपुर्जों जैसे भारतीय उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक का शुल्क लगाता था। अब बिना किसी शुल्क के बाजार पहुंच मिलने से भारतीय उत्पाद वहां अन्य देशों की वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। समझौते के तहत भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं के कबाड़ जैसे कच्चे माल भी शुल्क-मुक्त मिलेंगे जिससे उत्पादन लागत घटेगी एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी।

भारत ने 70.03 फीसदी शुल्क श्रेणियों (जिसकी मूल्य के हिसाब से द्विपक्षीय व्यापार में 95 फीसीदी हिस्सेदारी है) पर शुल्क में रियायत देने की पेशकश की है, जबकि 29.97 फीसदी शुल्क श्रेणियों को संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बाहर रखा गया है। इन संवेदनशील उत्पादों में मुख्य रूप से दुग्ध (दूध, क्रीम, पनीर आदि), अन्य पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम), चीनी, कृत्रिम शहद, वसा एवं तेल, हथियार एवं गोला-बारूद, रत्न एवं आभूषण, तांबा और एल्युमिनियम से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।

इसके अलावा भारत लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्चा चमड़ा जैसे उत्पादों सहित न्यूजीलैंड की करीब 30 फीसदी शुल्क श्रेणियों पर शुल्क समाप्त करेगा। वहीं, 35.60 फीसदी शुल्क श्रेणियों पर तीन, पांच, सात और 10 वर्ष में चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त किया जाएगा। इनमें पेट्रोलियम तेल, माल्ट एक्सट्रैक्ट, वनस्पति तेल, चयनित मशीनरी आदि शामिल हैं।

न्यूजीलैंड के जिन उत्पादों को शुल्क में रियायत मिलेगी उनमें वाइन, दवाएं, पॉलिमर, एल्युमिनियम, लोहा-इस्पात उत्पाद शामिल हैं। वहीं मनुका शहद, सेब, कीवी फल और एल्ब्यूमिन जैसे कुछ उत्पाद शुल्क दर कोटा के तहत आएंगे। समझौते में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। साथ ही निवेश लक्ष्य पूरे न होने की स्थिति में संतुलन स्थापित करने के लिए एक उपबंध भी जोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार 2.4 अरब डॉलर रहा था।

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