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उद्योगपति पवन रुइया गिरफ्तार

600 करोड़ का 'डिजिटल जाल', न्यू टाउन से दबोचा गया ठगी का मास्टरमाइंड

31 Mar 2026

उद्योगपति पवन रुइया गिरफ्तार

कोलकाता। बंगाल पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रख्यात उद्योगपति पवन रुइया को 600 करोड़ रुपये के कथित साइबर धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को हुई इस नाटकीय गिरफ्तारी ने औद्योगिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रुइया को न्यू टाउन स्थित एक नामी होटल के बाहर से घेराबंदी कर दबोचा गया। उन पर शेल कंपनियों के जरिए देशभर के हजारों मासूम लोगों से ठगी गई रकम को सफेद करने और मनी रूटिंग करने के गंभीर आरोप हैं। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की जड़ें साल 2024 में इको पार्क थाने में दर्ज एक शिकायत से जुड़ी हैं। शिकायतकर्ता स्वपन कुमार मंडल ने आरोप लगाया था कि देशभर में ऑनलाइन ठगी के जरिए लूटी गई रकम पवन रुइया और उनके परिवार के निजी बैंक खातों में भेजी जा रही है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1900 से ज्यादा पीडि़तों ने इस गिरोह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शुरुआती जांच में यह हेरफेर 315 करोड़ रुपये की लग रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच की परतें खुलीं, यह आंकड़ा चौंकाने वाले 600 करोड़ रुपये तक जा पहुँचा। 
जांच एजेंसियों का दावा है कि पवन रुइया ने अपने बेटे राघव और बेटी पल्लवी के साथ मिलकर फर्जी (शेल) कंपनियों का एक मकडज़ाल तैयार किया था। इन कंपनियों का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था, बल्कि इनका इस्तेमाल केवल ठगी के पैसे को घुमाने के लिए किया जाता था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे गोरखधंधे का मुख्यालय कोलकाता के सैयद अमीर अली एवेन्यू स्थित रुइया सेंटर को बनाया गया था। यहीं से तमाम बैंक खातों का संचालन और डिजिटल हेरफेर किया जाता था। पुलिस ने पिछले साल उनके ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी बरामद किए थे। गौरतलब है कि गिरफ्तारी के डर से पवन रुइया और उनके परिवार ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी। दिसंबर में अदालत ने पासपोर्ट जमा करने जैसी कड़ी शर्तों के साथ उन्हें राहत दी थी। हालांकि, जांच में नए और पुख्ता सबूत सामने आने के बाद पुलिस ने आखिरकार उन्हें हिरासत में ले लिया है। पवन रुइया का विवादों से पुराना नाता रहा है; इससे पहले 2016 में जेसोप फैक्ट्री से रेलवे उपकरणों की चोरी के मामले में भी उन्हें सलाखों के पीछे जाना पड़ा था। उनकी डनलप और जेसोप जैसी बंद पड़ी फैक्ट्रियों के अधिग्रहण को लेकर भी राज्य सरकार के साथ उनका लंबा विवाद चल रहा है। पवन रुइया की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की नजर उनके बेटे राघव और बेटी पल्लवी पर है, जिनका नाम भी इस एफआईआर में शामिल है। साइबर सेल इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इस ठगी के तार किसी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से भी जुड़े हैं। फिलहाल, पुलिस पवन रुइया को अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी ताकि 600 करोड़ रुपये के इस विशाल मनी ट्रेल का पूरा सच सामने लाया जा सके। इस गिरफ्तारी को बंगाल पुलिस की साइबर विंग के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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