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व्यावसायिक रंजिश बनी कत्ल की वजह
कोलकाता। महानगर के इंटाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत तृणमूल कार्यकर्ता तापस नस्कर की जघन्य हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। शनिवार देर रात चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने मामले के नामजद आरोपी भोलाराम कर उर्फ भोला कर को गिरफ्तार कर लिया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के ठीक बाद हुई इस हत्या से इलाके में भारी तनाव व्याप्त था, जिसे देखते हुए पुलिस की यह कार्रवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि 50 वर्षीय आरोपी भोला कर गिरफ्तारी से बचने के लिए हासनाबाद इलाके में मिथुन मंडल नामक व्यक्ति के घर में शरण लिए हुए है। इस सूचना के आधार पर पुलिस की एक टीम ने शनिवार रात वहां छापेमारी की और आरोपी को धर दबोचा। सूत्रों के अनुसार, तापस नस्कर की हत्या के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में भोला कर का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल था। पुलिस अब उसे हिरासत में लेकर हत्या की साजिश में शामिल अन्य लोगों और वारदात के पीछे के सटीक घटनाक्रम का पता लगाने में जुट गई है। पकड़े गए आरोपी को रविवार को शियालदह एसीजेएम अदालत में पेश किया जा रहा है।
गौरतलब है कि तापस नस्कर की हत्या मंगलवार देर रात उस समय कर दी गई थी, जब चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद वह इलाके में वापस लौटे थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें चौधुरी लेन में लहूलुहान अवस्था में पाया था, जिसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना के तुरंत बाद एक संदिग्ध को हिरासत में लिया था, जिससे मिली जानकारी ने दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी का मार्ग प्रशस्त किया।
यद्यपि यह मामला एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता से जुड़ा है, लेकिन कोलकाता पुलिस ने इसमें किसी भी तरह के राजनीतिक कोण को सिरे से खारिज कर दिया है। कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंदा ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक जांच और अब तक मिले साक्ष्यों के अनुसार, यह हत्या आपसी गुटबाजी और प्रमोटिंग यानी निर्माण व्यवसाय से जुड़े विवाद का परिणाम है। पुलिस आयुक्त के मुताबिक, दो गुटों के बीच वर्चस्व और कारोबार को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। स्थानीय सूत्रों और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मृतक तापस नस्कर का पिछला रिकॉर्ड भी विवादों से घिरा रहा है। उन पर इलाके में अवैध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे और स्थानीय थाने में उनके खिलाफ कई शिकायतें पहले से लंबित थीं। चुनाव से पहले भी पुलिस ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी थी और उन पर निगरानी रखी जा रही थी, जिसके डर से वह इलाका छोड़कर चले गए थे। जैसे ही वह मतदान और मतगणना के बाद वापस आए, उन पर यह जानलेवा हमला कर दिया गया। फिलहाल, पुलिस इस हत्याकांड की पूरी कडिय़ां जोडऩे का प्रयास कर रही है ताकि जल्द ही शेष आरोपियों को भी कानून के शिकंजे में लाया जा सके।