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सुदीप्त सेन की रिहाई पर फंसा कानूनी पेंच?

13 साल बाद जमानत, फिर भी सलाखों के पीछे 'सारदा किंगपिन'

09 Apr 2026

सुदीप्त सेन की रिहाई पर फंसा कानूनी पेंच?

कोलकाता। देश के सबसे चर्चित और बड़े आर्थिक घोटालों में से एक सारदा चिटफंड मामले के मुख्य आरोपी सुदिप्त सेन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कोलकाता के प्रेसीडेंसी जेल में बीते 13 सालों से बंद सुदीप्त सेन को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अंतिम दो लंबित मामलों में भी सशर्त जमानत दे दी है। इसके साथ ही सेन अब उन सभी 389 मामलों में जमानत पा चुके हैं, जो उनके खिलाफ विभिन्न थानों और केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए थे। हालांकि, तकनीकी और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण जमानत मिलने के बावजूद उनकी तत्काल रिहाई पर संशय बरकरार है। बुधवार को न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज और न्यायमूर्ति उदय कुमार की खंडपीठ ने उत्तर 24 परगना के बारासात थाने से जुड़े अंतिम दो मामलों में सेन को राहत दी। अदालत ने माना कि 64 वर्षीय सेन अपनी संभावित सजा से भी दोगुना समय जेल में बिता चुके हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक है। 
कानूनी जानकारों के मुताबिक, सुदिप्त सेन की रिहाई में सबसे बड़ी अड़चन अन्य राज्यों और विभिन्न जिलों की अदालतों में लंबित बेल बॉन्ड की प्रक्रिया है। जब तक हर मामले के बेल बॉन्ड संबंधित अदालतों में जमा होकर जेल प्रबंधन तक नहीं पहुँचते, तब तक उनकी रिहाई संभव नहीं है। बारासात कोर्ट में गुरुवार को बॉन्ड जमा करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन पुराने मामलों के दस्तावेजी मिलान ने समय बढ़ा दिया है। सुदिप्त सेन के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल कई जानलेवा बीमारियों (को-मॉर्बिडिटीज) से जूझ रहे हैं और हाल ही में वे ब्रेन स्ट्रोक का शिकार भी हुए थे। बचाव पक्ष का तर्क था कि सजा के अभाव में 13 साल की जेल की अवधि मौलिक अधिकारों का हनन है। 
अदालत ने भी स्वीकार किया कि इतने संवेदनशील मामले में रिकॉर्ड्स का गुम होना और सुनवाई में देरी होना गंभीर प्रशासनिक विफलता है, जिसका खामियाजा किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रहकर नहीं भुगतना चाहिए। अदालत ने सुदीप्त सेन की रिहाई के लिए ऐसी शर्तें रखी हैं जिन्हें आयरन-क्लैड (बेहद सख्त) कहा जा रहा है। सेन को 10,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा, लेकिन उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वे बिना अनुमति बंगाल से बाहर नहीं जा सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उन्हें अपना मोबाइल फोन हमेशा चालू रखना होगा और उसकी लाइव लोकेशन लगातार जांच अधिकारी के साथ साझा करनी होगी। 
इसके अलावा, वे किसी भी वित्तीय संस्था या मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम से नहीं जुड़ सकेंगे और न ही जनता से कोई पैसा जमा कर सकेंगे। सुदीप्त सेन की रिहाई ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण का प्रचार चरम पर है। विपक्षी दल जहां इसे राज्य सरकार की ढिलाई बता रहे हैं, वहीं तृणमूल इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा मान रही है। 17 लाख निवेशकों से लगभग 3,500 करोड़ रु. की धोखाधड़ी के इस मामले ने एक दशक पहले बंगाल की राजनीति को हिला दिया था। अब सेन के बाहर आने से इस घोटाले की गूँज चुनावी जनसभाओं में एक बार फिर सुनाई देने लगी है। फिलहाल, सभी की नजरें बारासात कोर्ट और जेल प्रबंधन पर टिकी हैं कि सुदिप्त सेन आज रात या कल सुबह तक जेल की दहलीज पार कर पाते हैं या नहीं।

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