ममता बनर्जी ने हमेशा एक बात कही है कि धर्म सबका अलग-अलग हो लेकिन उत्सव सबका एक होना चाहिए
दीघा। दीघा जगन्नाथ मंदिर को लेकर पश्चिम बंगाल के लोग काफी उत्साहित हैं।अक्षय तृतीया के मौके पर इसका उद्घाटन बुधवार को होने जा रहा है लेकिन हर किसी के मन में एक सवाल है कि आखिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दीघा जगन्नाथ मंदिर के स्थापना के लिए इस क्षेत्र को ही क्यों चुना। अगर इसके राजनीतिक मायने निकाले जाएं तो चुकी पश्चिम बंगाल में हिंदू और बंगाली समाज का पुरी जगन्नाथ मंदिर से एक दिल का रिश्ता जुड़ा हुआ है ऐसे में ममता बनर्जी ने पश्चिम पूर्व मेदिनीपुर में दीघा तट पर जगन्नाथ मंदिर बनाकर हिंदुओं को आस्था की डुबकी लगाने का एक बेहतरीन मौका दिया है।
साथ ही साथ इतिहास कहता है कि चैतन्य महाप्रभु ने अपने अंतिम समय के दिन उड़ीसा के जगन्नाथ धाम में बिताए थे। क्योंकि पूर्व मेदिनीपुर क्षेत्र चैतन्य महाप्रभु की कृपा पात्र वाला क्षेत्र कहा जाता है ऐसे में जगन्नाथ मंदिर और चैतन्य द्वारा बनाकर मुख्यमंत्री ने पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर के लोगों को एक साथ साधा है। चैतन्य महाप्रभु राणाघाट में वास करते थे ऐसे में राणाघाट के क्षेत्र को भी दीघा जगरनाथ मंदिर से जोडऩे की कोशिश की गई है और तो और अगर राजनीतिक रूप से देखा जाए तो राणाघाट और पूर्व मेदिनीपुर बीजेपी का गढ़ है ऐसे में जब बीजेपी हिंदुत्व के मौके पर के मुद्दे पर राजनीति कर रही है तो इसे ममता बनर्जी का पूर्व मेदिनीपुर में ही जगन्नाथ मंदिर बनाकर अब तक का सबसे बड़ा मास्टर कार्ड माना जा रहा है। इसे ममता बनर्जी का मास्टर स्ट्रोक भी कहें तो कोई दो राय नहीं होगी।
ममता बनर्जी ने हमेशा एक बात कही है कि धर्म सबका अलग-अलग हो लेकिन उत्सव सबका एक होना चाहिए।जगन्नाथ मंदिर में जिस प्रकार से हिंदुओं की आस्था का एक प्रतीक बनाया गया है इसे हिंदू समाज में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति और भी उदारता देखी जा रही है।हिंदू समाज का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बनाकर बहुत अच्छा काम किया है। भगवान जगन्नाथ मंदिर दीघा के समुद्र तट पर स्थित है ऐसे में पर्यटन को भी बहुत बढ़ावा मिलेगा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कई मौके पर यह कहा है कि आने वाले सैकड़ो सालों तक या मंदिर लोगों के बीच एक ताकत और हिम्मत बनकर यूं ही अडिग खड़ा रहेगा। जिसमें लोग आकर पूजा पाठ कर भगवान जगन्नाथ का दर्शन कर खुद को कृतज्ञ करेंगे। वैसे तो मंदिर की वजह से दीघा पहले से ही प्रसिद्ध हो चुका है लेकिन अगर दीघा जगन्नाथ धाम को जगन्नाथ मंदिर का पर्याय कहा जाए तो इसमें और भी मिठाई में सुगंध वाली बात हो जाएगी। भगवान जगन्नाथ ऐसा लग रहा है मानो स्वयं पधार गए हैं और दीघा में विराजमान हो गए हैं। वैसे तो पुरी जगन्नाथ मंदिर को पृथ्वी का हृदय कहा जाता है लेकिन दीघा जगन्नाथ मंदिर भी एक नई कीर्तिमान की तरफ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही मेहनत कर दीघा जगरनाथ धाम बनाकर समाज को यह उपहार स्वरूप दिया है।