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निगम की दीवारों से जल्द हटेगी ममता की तस्वीर!
कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब राजनीतिक हलचल का असर धीरे-धीरे कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में भी दिखाई देने लगा है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद अब कोलकाता नगर निगम की गतिविधियों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों हलकों की नजर टिक गई है। निगम के अंदर इन दिनों जिस मुद्दे की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है मेयर फिरहाद हकीम और निगम आयुक्त स्मिता पांडेय के बीच बढ़ती दूरी।सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से मेयर फिरहाद हकीम नियमित रूप से निगम मुख्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर निगम आयुक्त स्मिता पांडे लगातार सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रही हैं।
बताया जा रहा है कि वह प्रतिदिन विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रही हैं और विभिन्न परियोजनाओं व प्रशासनिक मामलों को लेकर लगातार निर्देश जारी कर रही हैं। निगम के अंदर यह चर्चा तेज हो गई है कि सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक नियंत्रण को नए सिरे से मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच सोमवार को प्रस्तावित एमआईसी की महत्वपूर्ण बैठक अचानक रद्द कर दी गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि बैठक रद्द करने के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया। इस फैसले के बाद निगम के भीतर कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मेयर और निगम प्रशासन के बीच समन्वय की कमी अब खुलकर सामने आने लगी है।
निगम सूत्रों का कहना है कि कई एमआईसी सदस्य भी इन दिनों निगम मुख्यालय आने से बच रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि निगम के भीतर राजनीतिक असहजता लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर निगम प्रशासन अपनी कार्यशैली में तेजी लाता नजर आ रहा है। अब सबसे ज्यादा चर्चा निगम मुख्यालय के चैंबरों में लगी तस्वीरों को लेकर हो रही है। फिलहाल मेयर, उपमेयर और विभिन्न एमआईसी चैंबरों में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीरें लगी हुई हैं। जबकि सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार वर्तमान मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाए जाने की परंपरा मानी जाती है।सूत्र बताते हैं कि जल्द ही निगम के सभी प्रमुख चैंबरों से ममता बनर्जी की तस्वीर हटाकर वर्तमान मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर लगाई जा सकती है। इस संभावित बदलाव को लेकर निगम के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर मेयर और एमआईसी चैंबरों में लगाई जाती है, तो क्या फिरहाद हकीम और दूसरे एमआईसी सदस्य उन्हीं चैंबरों में बैठकर काम करेंगे? हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक कोई भी नेता या निगम अधिकारी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।राज्य की सत्ता बदलने के बाद अब भाजपा की नजर कोलकाता नगर निगम पर भी है। आने वाले दिनों में निगम प्रशासन और राजनीतिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल निगम के गलियारों में सन्नाटा जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन अंदरखाने हलचल लगातार तेज हो रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में निगम की राजनीति किस दिशा में जाती है और प्रशासनिक स्तर पर क्या बड़े फैसले सामने आते हैं। फिलहाल इन तमाम चर्चाओं और अटकलों को वक्त पर छोड़ देना ही बेहतर माना जा रहा है।