Please wait
select city
notifications
Live Tv
Search
भवानीपुर चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली ममता की याचिका पर सुनवाई, हाई कोर्ट ने मतदान सामग्री सुरक्षित रखने का दिया निर्देश Sudhir wins historic वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए Sudhir wins historic अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रेड रोड में भव्य आयोजन, पीएम मोदी बोले - योग मानव चेतना से जुड़ने का जरिया Sudhir wins historic झारखंड राज्यसभा चुनाव: झामुमो के बैद्यनाथ राम और निर्दलीय परिमल नथवानी विजयी Sudhir wins historic फलता हिंसा पर मुख्यमंत्री का सख्त संदेश, बोले- कोई कानून हाथ में न ले, हमलावरों की संपत्ति भी होगी जब्त Sudhir wins historic वरिष्ठ तृणमूल नेता और पूर्व मंत्री उदयन गुहा गिरफ्तार Sudhir wins historic फुटपाथ पर मुड़ी-घुघनी खाते दिखे मंत्री शंकर घोष Sudhir wins historic पारसी फायर टेम्पल से हटेगा अवैध कब्जा Sudhir wins historic ममता बनर्जी को एक और झटका, पूर्व मंत्री मानस भुइयां ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ी Sudhir wins historic असम में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए सीधे आधार नहीं : डॉ. हिमंत बिस्व सरमा Sudhir wins historic

फिरहाद के इस्तीफे के बाद कोलकाता निगम पर मंडराया 'भंग' होने का खतरा

सरकार ने थमाया कारण बताओ नोटिस, 3 दिनों में मांगा जवाब

06 Jun 2026

फिरहाद के इस्तीफे के बाद कोलकाता निगम पर मंडराया 'भंग' होने का खतरा

कोलकाता। मेयर पद से फिरहाद हाकिम के अचानक इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के ठीक बाद हरकत में आते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के नगर विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग ने कोलकाता नगर निगम को एक कड़ा कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर दिया है। सरकार ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए क्यों न कोलकाता नगर निगम बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाए? राज्य सरकार ने इस बेहद संवेदनशील मामले पर निगम प्रशासन को लिखित जवाब दाखिल करने के लिए महज तीन दिनों की सख्त मोहलत दी है। 
नगर विकास विभाग द्वारा जारी इस नोटिस में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि मेयर के पद छोडऩे के बाद से कोलकाता नगर निगम नागरिकों को प्रभावी और आवश्यक सेवाएं देने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। शीर्ष स्तर पर आए इस शून्य के कारण पूरे शहर का प्रशासनिक कामकाज ठप हो गया है और नागरिक सेवाओं में भारी बाधा आने की आशंका बढ़ गई है। विभाग ने कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 117(1) का हवाला देते हुए साफ किया है कि यदि कोई नगर निकाय अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ रहता है या लापरवाही बरतता है, तो राज्य सरकार उसे अक्षम घोषित कर अधिकतम छह महीने के लिए पूरी तरह भंग कर सकती है। हालांकि, कानूनी बाध्यताओं के तहत धारा 117(2)(ए) के अनुसार निगम को अपना पक्ष रखने का मौका देना अनिवार्य है, इसीलिए यह तीन दिवसीय अल्टीमेटम जारी किया गया है।
इस बड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कोलकाता के पूर्व मेयर और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के इस कदम पर कानूनी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार सीधे तौर पर चुने हुए नगर निगम बोर्ड को बर्खास्त नहीं कर सकती, वह केवल स्पष्टीकरण मांग सकती है। वहीं, तृणमूल-शासित नगर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सच्चिदानंद बनर्जी ने याद दिलाया कि ऐसी स्थिति पहले भी आ चुकी है और तब बोर्ड भंग करने के बजाय प्रशासक नियुक्त कर सेवाएं जारी रखी गई थीं। वर्तमान हालात में भी प्रशासक की नियुक्ति ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प नजर आता है। गौरतलब है कि शुक्रवार को फिरहाद हाकिम ने निगम की अध्यक्ष माला रॉय को अपना इस्तीफा सौंपते हुए दर्द बयां किया था कि वे अब पहले की तरह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे, इसलिए पद की गरिमा के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही निगम के वास्तविक प्रशासनिक अधिकार आयुक्त स्मिता पांडे के पास केंद्रित हो चुके थे, जिससे मेयर असहज महसूस कर रहे थे। अब यदि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो धारा 118 के तहत मेयर, पार्षद और मेयर-इन-काउंसिल के सभी पद शून्य हो जाएंगे और कोलकाता की कमान पूरी तरह सरकारी प्रशासकों के हाथ में चली जाएगी।

Ad Image
Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


फिरहाद के इस्तीफे के बाद निगम पर मंडराया 'भंग' होने का खतरा
सरकार ने थमाया कारण बताओ नोटिस, 3 दिनों में मांगा जवाब





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News