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गंगा में बचाव कार्य के लिए नई तकनीक अपनाएगी कोलकाता पुलिस

पानी के भीतर से 'हेलो' बोलेंगे गोताखोर

09 Mar 2026

गंगा में बचाव कार्य के लिए नई तकनीक अपनाएगी कोलकाता पुलिस

कोलकाता। गंगा के गंदले पानी ने अंडरवाटर सर्च ऑपरेशन में बड़ी बाधा पैदा कर दी है। इसी वजह से कोलकाता पुलिस ने पानी के अंदर काम करने वाले ड्रोन के बजाय एक उन्नत अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम खरीदने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि गंगा के कई स्थानों पर वॉटर ड्रोन का ट्रायल किया गया था, लेकिन नदी के अत्यधिक मटमैले पानी के कारण साफ वीडियो फुटेज नहीं मिल पाया। इससे वास्तविक रेस्क्यू मिशन में इस तकनीक की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए।
अधिकारी ने कहा कि गंगा का पानी बेहद गंदला है। ड्रोन जब सतह से कई मीटर नीचे गया तब भी कैमरे साफ तस्वीर नहीं ले पाए। कुछ मीटर दूर की चीजें भी देख पाना मुश्किल था। इन सीमाओं को देखते हुए शहर की पुलिस ने अब एक उन्नत अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम खरीदने को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इस सिस्टम से डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप के गोताखोरों को सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नदी किनारे मौजूद कंट्रोल टीम के साथ लगातार संपर्क में रहने में मदद मिलेगी।
यह सिस्टम दो गोताखोरों को आपस में और किनारे पर तैनात कर्मियों से भी संवाद करने की सुविधा देगा। अधिकारियों ने बताया कि गोताखोरों के फुल-फेस मास्क पहनने के बावजूद भी संचार बाधित नहीं होगा। सिस्टम में रंग-कोडेड कम्युनिकेशन रस्सियां या केबल होंगी, जो गोताखोरों को सतह पर मौजूद यूनिट से जोड़ेंगी। साथ ही वाटरप्रूफ ईयरफोन और माइक्रोफोन के जरिए वे साफ-साफ संदेशों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
विशेष नॉइज-फिल्टरिंग फीचर भी होंगे, ताकि पानी के भीतर बनने वाले बुलबुले या अन्य शोर संचार में बाधा न डालें। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि अगर किसी ऑपरेशन के दौरान गोताखोर को कुछ संदिग्ध दिखता है या उसे किसी तरह का खतरा महसूस होता है, तो वह तुरंत इसकी जानकारी दूसरे गोताखोरों और सतह पर मौजूद कंट्रोल यूनिट को दे सकेगा।
कोलकाता पुलिस इस अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम की खरीद पर लगभग 24 लाख रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। यह उपकरण डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप को सौंपा जाएगा।
कम्युनिकेशन सिस्टम के अलावा लालबाजार अंडरवाटर रेस्क्यू क्षमता को मजबूत करने के लिए आधुनिक डाइविंग उपकरणों में भी निवेश कर रहा है। करीब 3.15 करोड़ रुपये की लागत से विशेष मास्क से लैस 10 सेट उन्नत डाइविंग सूट खरीदे जा रहे हैं, जिससे गोताखोर लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि ये सूट जहरीली गैसों को बाहर निकालने और पानी के भीतर दृश्यता बढ़ाने में भी मदद करेंगे।
नदी की सतह पर गोताखोरों की मदद और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए पुलिस करीब 44 लाख रुपये की लागत से 20 रबर बोट भी खरीद रही है। हर नाव में पांच रेस्क्यूकर्मियों के बैठने की क्षमता होगी।
इसके अलावा डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप और रिवर पुलिस यूनिट के लिए 120 चमकीले नारंगी फ्लोटिंग रिंग भी खरीदे जा रहे हैं, जिनकी कीमत लगभग तीन हजार रुपये प्रति रिंग होगी। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कुल छह लाख रुपये की लागत से चार पैडल बोट भी खरीदी जा रही हैं, जिनमें हर नाव में दो रेस्क्यूकर्मी सवार हो सकेंगे।
इसके अतिरिक्त 70 लाइफ जैकेट और पानी के भीतर काम करने वाले पांच विशेष हाइड्रोलिक कटर भी खरीदे जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार लगभग 15 लाख रुपये की लागत वाले ये कटर 25 मीटर तक की गहराई में डूबी नावों या अन्य जलयान को काटने में सक्षम होंगे।
पुलिस के मुताबिक, लगभग छह करोड़ रुपये की कुल लागत से की जा रही इस खरीद का उद्देश्य गंगा समेत कोलकाता के बड़े जलाशयों में आपात स्थितियों से निपटने की शहर की क्षमता को मजबूत करना है।

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