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तपसिया स्थित तृणमूल के अस्थायी पार्टी कार्यालय पर लगा ताला

पार्टी कार्यक्रमों को सेवाएं देना बंद करने से लेकर कार्यालय खाली करने के नोटिस तक, कई घटनाओं ने इस संबंध में आई खटास को उजागर किया है

17 Jun 2026

तपसिया स्थित तृणमूल के अस्थायी पार्टी कार्यालय पर लगा ताला

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस को एक और असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी नेतृत्व के करीबी रहे कई नेता, समर्थक और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ दूरी बढ़ने की चर्चाओं के बीच अब महानगर क्षेत्र स्थित तृणमूल के अस्थायी पार्टी कार्यालय को खाली किए जाने की घटना ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
तृणमूल सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक समय के करीबी माने जाने वाले व्यवसायी मनोतोष साहा उर्फ मन्टू साहा ने कोलकाता के पूर्वी मेट्रोपॉलिटन (ईएम) बाईपास, टोपसिया स्थित तृणमूल कांग्रेस के अस्थायी कार्यालय (जिसे 'तृणमूल भवन' कहा जाता है) काे गत मई माह में खाली करने का नोटिस दिया था। इस बहुमंजिला भवन के मालिक स्वयं मन्टू साहा हैं। लंबे समय से इसी भवन के एक हिस्से से पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, भवन खाली करने के लिए पार्टी को दो माह का समय दिया गया था। हालांकि, राजनीतिक हलकों में पहले से ही चर्चा थी कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले ही कार्यालय को अन्यत्र स्थानांतरित किया जा सकता है, अंततः वही हुआ। मंगलवार रात भवन की दो मंजिलें पूरी तरह खाली कर दी गईं। शेष हिस्सों से भी कार्यालय सामग्री और अन्य संसाधनों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस अस्थायी कार्यालय का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने तपसिया स्थित पुराने ‘तृणमूल भवन’ के आधुनिकीकरण की पहल की थी। पार्टी मुख्यालय को आधुनिक और कॉरपोरेट स्वरूप देने के उद्देश्य से पुराने कार्यालय से अस्थायी रूप से स्थानांतरित होने का निर्णय लिया गया था। उसी समय मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के इस बहुमंजिला भवन को अस्थायी पार्टी कार्यालय के रूप में चुना गया था।
दक्षिण कोलकाता के सजावट व्यवसाय से जुड़े मन्टू साहा का राजनीतिक और व्यावसायिक प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। राजनीतिक हलकों के एक वर्ग का दावा है कि तृणमूल की विभिन्न सभाओं, रैलियों और कार्यक्रमों में उनकी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। लेकिन हाल के समय में उनके और तृणमूल के बीच बढ़ती दूरी के संकेत लगातार मिल रहे थे। पार्टी कार्यक्रमों को सेवाएं देना बंद करने से लेकर कार्यालय खाली करने के नोटिस तक, कई घटनाओं ने इस संबंध में आई खटास को उजागर किया है।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम पर मनोतोष साहा की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में उनके इस फैसले के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर राजनीतिक महकमे में अटकलों का दौर जारी है। तृणमूल के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी पहले से ही विभिन्न विवादों, जांच और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।

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