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अनिश्चितकालीन घेराव से थमी रफ्तार, मांगों पर अड़े आंदोलनकारी
कोलकाता। साल्टलेक का प्रशासनिक हृदय क्षेत्र गुरुवार को उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब पश्चिम बंगाल रीकॉग्नाइज्ड अनएडेड मदरसा ऐक्यमंच के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों और छात्रों ने मदरसा परिषद के कार्यालय पर धावा बोल दिया। अपनी उपेक्षा और लंबित मांगों को लेकर आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने परिषद कार्यालय के मुख्य द्वार को घेरते हुए इसे अनिश्चितकालीन घेराव में बदल दिया है। सड़क पर ही डेरा जमाकर बैठे आंदोलनकारियों का स्पष्ट संदेश है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि अधिकार चाहिए। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राज्य के 235 अनएडेड मदरसों के साथ प्रशासन लंबे समय से सौतेला व्यवहार कर रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से बिना सरकारी मदद के शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें वित्तीय सुरक्षा और मान्यता से जुड़े अधिकारों के नाम पर केवल उपेक्षा मिली है।
मदरसा ऐक्यमंच के नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस लिखित आदेश जारी नहीं होता, वे टस से मस नहीं होंगे। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी अपने शिक्षकों के समर्थन में सड़कों पर उतरे हैं। आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए बिधान नगर पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। मदरसा परिषद की ओर जाने वाली सड़कों पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों के भारी हुजूम और उनके अटूट संकल्प के आगे पुलिसिया दीवारें छोटी साबित हुईं। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पार कर कार्यालय के ठीक सामने सड़क पर बैठ गए। इस विरोध प्रदर्शन का सीधा असर साल्टलेक की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। व्यस्त समय होने के कारण साल्टलेक के करुणामयी, सिटी सेंटर और विकास भवन के आसपास के रास्तों पर घंटों वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने और शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि वे केवल परिषद के उच्चाधिकारियों से ठोस आश्वासन मिलने पर ही पीछे हटेंगे। जैसे-जैसे शाम ढली, आंदोलनकारियों का हौसला और बढ़ता दिखा, जिससे प्रशासनिक हलकों में बेचैनी बढ़ गई है। फिलहाल, साल्टलेक का यह क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील है और मदरसा शिक्षकों की गूंज न केवल प्रशासनिक दीवारों को बल्कि राज्य की राजनीति को भी झकझोर रही है।