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महाराष्ट्र: मराठी न आने पर शिवसेना यूबीटी ने की विधानसभा अध्यक्ष को निलंबित करने की मांग

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के मराठी भाषा के वाचन में हुई त्रुटियों को लेकर उन पर हमला बोला है। राउत ने बुधवार को कहा कि यदि राज्य में मराठी भाषा को लेकर आम लोगों पर सख्ती बरती जाती है, तो विधानसभा अध्यक्ष के मामले में भी समान मापदंड लागू होने चाहिए। उन्होंने राहुल नार्वेकर को निलंबित किए जाने की मांग की।

24 Jun 2026

महाराष्ट्र: मराठी न आने पर शिवसेना यूबीटी ने की विधानसभा अध्यक्ष को निलंबित करने की मांग

मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के मराठी भाषा के वाचन में हुई त्रुटियों को लेकर उन पर हमला बोला है। राउत ने बुधवार को कहा कि यदि राज्य में मराठी भाषा को लेकर आम लोगों पर सख्ती बरती जाती है, तो विधानसभा अध्यक्ष के मामले में भी समान मापदंड लागू होने चाहिए। उन्होंने राहुल नार्वेकर को निलंबित किए जाने की मांग की।

बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की पहचान उसकी मराठी भाषा और संस्कृति से है। राज्य में मराठी को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और कई क्षेत्रों में मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य बनाए जाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिक्शा-टैक्सी चालकों, दुकानदारों, फेरीवालों और अन्य आम नागरिकों पर मराठी सीखने का दबाव बनाया जाता है तथा भाषा नहीं आने पर उनके रोजगार तक प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो जाती है।

राउत ने कहा कि ऐसे माहौल में महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा सदन में शोक प्रस्ताव पढ़ते समय बड़ी संख्या में त्रुटियां करना गंभीर विषय है। उनके अनुसार मंगलवार को शोक प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय नार्वेकर साफ-सुथरी लिखी गई मराठी को सही ढंग से नहीं पढ़ सके और कुछ ही मिनटों में 40 से अधिक गलतियां कर बैठे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम लोगों से मराठी भाषा को लेकर कठोर अपेक्षाएं रखी जाती हैं, तब संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए अलग व्यवस्था क्यों होनी चाहिए।

संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल नार्वेकर को उनके उपनाम के आधार पर “नार्वे का निवासी” कहा जा सकता है, इसलिए मराठी भाषा को लेकर बनाए गए मानकों के अनुसार उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। हालांकि उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक व्यंग्य के रूप में देखी जा रही है।

इस विवाद में मुंबई की पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर भी शामिल हो गईं। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पहली कक्षा स्तर की मराठी भी ठीक प्रकार से नहीं पढ़ सके। पेडणेकर ने कहा कि इस घटना के बाद राहुल नार्वेकर को आत्मचिंतन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

विवाद बढ़ने के बाद राहुल नार्वेकर ने बुधवार को विधानसभा में अपनी सफाई देते हुए मराठी वाचन में हुई त्रुटियों के लिए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को सदन में कुल 12 शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने थे और प्रस्तावों का पाठ अत्यंत बारीक अक्षरों में लिखा हुआ था, जिसके कारण उनसे कुछ गलतियां हो गईं।

नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि उन्हें मराठी भाषा पर गर्व है और वे हमेशा मराठी भाषा तथा संस्कृति का सम्मान करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी उन्होंने अनेक अवसरों पर मराठी में प्रस्ताव और अन्य संसदीय कार्यवाही का संचालन किया है। इस बार हुई गलती अनजाने में हुई है, जिसके लिए वे राज्य की जनता से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटि न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि मराठी भाषा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को मराठी अस्मिता और भाषा सम्मान से जोड़कर सरकार तथा विधानसभा अध्यक्ष को घेरने का प्रयास कर रहा है, जबकि राहुल नार्वेकर ने अपनी गलती स्वीकार कर मामले को शांत करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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