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लोकपाल को दो माह की अंतिम मोहलत, आगे नहीं मिलेगा समय
कोलकाता। बहुचर्चित 'घूस के बदले सवालÓ मामले में तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, हालांकि उन्हें प्रक्रियात्मक आधार पर फिलहाल कुछ समय की राहत जरूर मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल को सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति देने पर पुनर्विचार के लिए दो महीने की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम अवसर है और इसके बाद किसी भी परिस्थिति में समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने लोकपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि निस्तारण की अवधि दो महीने के लिए बढ़ाई जाती है, लेकिन यह स्पष्ट किया जाता है कि भविष्य में समय विस्तार के किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि महुआ मोइत्रा और सीबीआई के वकीलों ने भी इस समय विस्तार पर कोई आपत्ति नहीं जताई। पूरा मामला लोकपाल द्वारा 12 नवंबर को दिए गए उस आदेश से शुरू हुआ था, जिसमें सीबीआई को महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी। महुआ मैत्रा ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि लोकपाल ने नियमों का उल्लंघन किया है और उनका पक्ष निष्पक्ष रूप से नहीं सुना गया। हाई कोर्ट ने पिछले साल 19 दिसंबर को लोकपाल के पुराने आदेश को रद्द कर दिया था और एक महीने के भीतर कानूनी प्रावधानों के तहत नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया था। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद लोकपाल ने पुनर्विचार प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत से और समय मांगा था, जिसे शुक्रवार को मंजूरी मिल गई। महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने दुबई के कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महंगे उपहार लेकर संसद में उद्योगपति गौतम अडानी और केंद्र सरकार को निशाना बनाने वाले सवाल पूछे थे। सीबीआई रिपोर्ट के अनुसार, हीरानंदानी ने स्वीकार किया है कि उनके पास महुआ की संसद लॉग-इन आईडी थी, जिसका उपयोग सवाल पोस्ट करने के लिए किया गया। इन्ही आरोपों के चलते भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने जांच की थी, जिसके बाद दिसंबर 2023 में महुआ की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। हालांकि, 2024 के चुनाव में वह दोबारा कृष्णानगर सीट से जीतकर संसद पहुंचीं। अदालत द्वारा दी गई दो महीने की यह मोहलत मार्च 2026 के अंत तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान लोकपाल को यह तय करना होगा कि क्या सीबीआई के पास महुआ मोइत्रा के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत हैं।
यदि लोकपाल दोबारा मंजूरी देता है, तो सीबीआई विशेष अदालत में विधिवत चार्जशीट दाखिल कर सकेगी।