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निजी ब्लड बैंकों ने दूसरे राज्यों में बेचे हजारों लीटर ब्लड
कोलकाता। बंगाल में रक्तदान शिविरों के जरिए एकत्र किए गए खून और प्लाज्मा के काले कारोबार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग और स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेल (एसबीटीसी) की गहन जांच में खुलासा हुआ है कि कोलकाता के निजी ब्लड बैंक बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के दूसरे राज्यों और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों को हजारों लीटर रक्त व प्लाज्मा बेच रहे थे। इस मामले में पद्मपुकुर के हेल्थ प्वाइंट के बाद अब दक्षिण कोलकाता के अशोक ब्लड बैंक को स्वास्थ्य भवन द्वारा समन जारी किया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित ब्लड बैंक को खरीद-बिक्री के सभी मूल दस्तावेजों के साथ तलब किया गया है।
जांच में सामने आए आंकड़े बेहद डरावने और चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों के भीतर ही संबंधित संस्थानों ने करीब 22,314 यूनिट (लगभग 7,800 लीटर) रेड ब्लड सेल्स (आरबीसी) लगभग 1.70 करोड़ रुपये में बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के निजी ब्लड बैंकों को अवैध रूप से सप्लाई कर दी। इसके अलावा, मरीजों की जीवन रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाला करीब 31,190 यूनिट (लगभग 6,300 लीटर) प्लाज्मा हैदराबाद और मुंबई स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनियों को करीब 4.20 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इस पूरे खेल में पटना, मुजफ्फरपुर, वाराणसी और बलरामपुर तक फैले नेटवर्क की कडिय़ां जुड़ी पाई गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) और नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) की लिखित अनुमति के बिना अंतरराज्यीय स्तर पर रक्त या उसके अवयवों को स्थानांतरित करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। स्वास्थ्य भवन ने मामले से जुड़े सभी संदिग्ध रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं और वर्तमान में सात बड़े निजी ब्लड बैंकों की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है, जिसके दोषी पाए जाने पर संबंधित संस्थानों का लाइसेंस रद्द कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।