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खरगे ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री के लिए शौचालय भी आरक्षित किया जा सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने और राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर में कथित रूप से देरी करवाने के लिए मोदी और शाह की आलोचना की।
रांची: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा होने के बावजूद विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) को हवाई अड्डे के आरक्षित लाउंज तक पहुंच उपलब्ध नहीं कराई जा रही।
खरगे ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री के लिए शौचालय भी आरक्षित किया जा सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने और राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर में कथित रूप से देरी करवाने के लिए मोदी और शाह की आलोचना की। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘कल हमारे नेता राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर में जानबूझकर 2 की घंटे की देरी की गयी, क्योंकि प्रधानमंत्री अपने विमान में बैठे थे। आज मेरे हेलीकॉप्टर को 20 मिनट देरी से उतारा गया, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उतर रहे थे। उनका रास्ता अलग था और मेरा रास्ता अलग था।'' उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, वह कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखते हैं। खरगे ने कहा कि मेरे पास भी यह दर्जा है, लेकिन हवाई अड्डे के आरक्षित लाउंज में, वे (अधिकारी) कहते हैं कि यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए है, मैं पूछना चाहता हूं कि क्या प्रधानमंत्री के लिए शौचालय भी आरक्षित किया जा सकता है।''
भाजपा द्वारा उठाए गए घुसपैठ के मुद्दे पर निशाना साधते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह के पास इसे रोकने की शक्ति है और इसके बावजूद वह लोगों को डरा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह सो रहे हैं। सत्ता में होने के बावजूद वे घुसपैठ क्यों नहीं रोक सकते। जब वे एक हेलीकॉप्टर को रोक सकते हैं, तो वे घुसपैठियों को क्यों नहीं रोक सकते।" खरगे ने केंद्र पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों की मदद करने वालों के खिलाफ ईडी, सीबीआई एवं आयकर जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड में सरकार बनाकर उसके प्राकृतिक संसाधनों को लूटना चाहती है। भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वे कहते हैं ‘बंट गए तो कट गए', मैं कहता हूं 'डर गए तो मर गए'।" उन्होंने सरना धार्मिक संहिता को आदिवासी गौरव का प्रतीक बताया और इसकी रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।