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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
केरल के नाम को बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी ने इस घटनाक्रम को भाजपा और माकपा (सीपीएम) के बीच 'लिखित जुगलबंदी' का परिणाम करार दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर केरल को उसकी भाषाई पहचान के अनुरूप नाम बदलने का अधिकार मिल सकता है, तो पश्चिम बंगाल को 'बंगाल' नाम से क्यों वंचित रखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने केरल की जनता को बधाई देते हुए स्पष्ट किया कि वे राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करती हैं, लेकिन बंगाल के मामले में केंद्र का रवैया हमेशा दमनकारी रहा है। उन्होंने कहा कि वर्णानुक्रम में 'वेस्ट बंगाल' का नाम अंत में होने के कारण राज्य को प्रशासनिक बैठकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उपेक्षा झेलनी पड़ती है। बंगाल के छात्रों को भी परीक्षाओं में इसी कारण पीछे बैठना पड़ता है।
ममता ने सवाल उठाया कि जब राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से तीन बार नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किया और केंद्र की आपत्तियों के बाद तीनों भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला) में एक ही नाम 'बंगाल' का संशोधित प्रस्ताव भेजा, तो उसे ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया? ममता बनर्जी ने तीखे लहजे में कहा कि जब चुनाव आते हैं तो भाजपा के नेता 'बंगाल' शब्द का गुणगान करते हैं, लेकिन जब राज्य की संस्कृति और बौद्धिक पहचान को मान्यता देने की बारी आती है, तो वही दिल्ली की सरकार 'बांग्लादेश' के साथ नाम की समानता का तकनीकी बहाना बनाकर अड़ंगा डाल देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा और सीपीएम की आपसी साठगांठ अब पर्दे के पीछे नहीं रही, बल्कि पूरी तरह जगजाहिर हो चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, केरल को मिली मंजूरी इसी 'पॉलिटिकल सेटिंग' का नतीजा है, जबकि बंगाल की वाजिब मांग को बार-बार ठुकराया जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का नाम बदलना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनभावनाओं और भाषाई गौरव से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि सरकारें बदलती रहेंगी, लेकिन बंगाल का नाम बदलने की यह लड़ाई वह आखिरी दम तक जारी रखेंगी।
ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार बंगाल की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करना बंद करे। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब केंद्र को बंगाल की इस मांग के आगे झुकना पड़ेगा और राज्य को अपना गौरवशाली संक्षिप्त नाम 'बंगाल' वापस मिलेगा।
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