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राशन घोटाले के आरोपों को बताया बड़ी साजिश
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के रण में उत्तर 24 परगना की हाबड़ा सीट इस वक्त सबसे बड़ा सियासी हॉटस्पॉट बन गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी जनसभा के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक (बालू) के पक्ष में पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री ने न केवल मलिक को अपना सबसे पसंदीदा और बेहतरीन उम्मीदवार बताया, बल्कि सार्वजनिक मंच से उन्हें एक तरह का 'पवित्रता प्रमाण-पत्र' भी थमा दिया। ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि ज्योतिप्रिय मलिक के साथ घोर अन्याय हुआ है और उन्हें एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत सलाखों के पीछे भेजा गया था। हाबड़ा के वाणीपुर मैदान में आयोजित इस विशाल जनसभा में ममता बनर्जी का पूरा भाषण ज्योतिप्रिय मलिक की छवि को सुधारने और विपक्ष पर हमला बोलने पर केंद्रित रहा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके शासनकाल में राशन विभाग में जितना सुधार मलिक ने किया, उतना किसी और ने नहीं किया। उन्होंने दलील दी कि ज्योतिप्रिय ने ही फर्जी राशन कार्डों के गोरखधंधे को पकड़ा था, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। ममता ने राशन घोटाले के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भाजपा और वाम दलों ने केवल ईष्र्या के चलते एक कर्मठ नेता को निशाना बनाया है। मुख्यमंत्री ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे बाहरी ताकतों की कुत्सा और झूठे प्रचार पर कान न दें और अपने पुराने नेता को भारी मतों से विजयी बनाएं।
गौरतलब है कि ज्योतिप्रिय मलिक के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई है। साल 2023 में ईडी द्वारा राशन भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्हें लगभग 15 महीने जेल में बिताने पड़े थे। जनवरी 2025 में जमानत पर बाहर आने के बाद भी उनकी उम्मीदवारी को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन तृणमूल ने उन्हें फिर से हाबड़ा से मैदान में उतारकर यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी है। ममता बनर्जी ने मलिक को फिर से उम्मीदवार बनाकर यह संदेश भी दिया है कि वे केंद्रीय एजेंसियों की जांच को पॉलिटिकल वेंडेटा यानी राजनीतिक प्रतिशोध से ज्यादा कुछ नहीं मानतीं। हाबड़ा की इस चुनावी रैली ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार बनाम ईमानदारी की लड़ाई बता रहा है, वहीं ममता बनर्जी ने इसे साजिश बनाम न्याय का रूप दे दिया है।
मुख्यमंत्री का यह खुला समर्थन ज्योतिप्रिय मलिक के समर्थकों के लिए संजीवनी जैसा साबित हो रहा है, लेकिन दूसरी ओर भाजपा इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अब हाबड़ा की जनता को यह तय करना है कि वे ममता बनर्जी के 'क्लीन चिट सर्टिफिकेटÓ पर मुहर लगाते हैं या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को तरजीह देते हैं। चुनाव से ठीक पहले तृणमूल सुप्रीमो का यह आक्रामक रुख आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और भी ज्यादा गर्माने वाला है।