मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू ने संथाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं विकास में अतुलनीय योगदान दिया है। उनके इस अमूल्य योगदान को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने उनके जन्मदिवस पर पहली बार सरकारी अवकाश घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर महान भाषातत्वविद् और ‘अलचिकी’ लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू ने संथाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं विकास में अतुलनीय योगदान दिया है। उनके इस अमूल्य योगदान को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने उनके जन्मदिवस पर पहली बार सरकारी अवकाश घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। साथ ही, उनकी स्मृति को संजोने के लिए एक कॉलेज की भी स्थापना की गई है।
ममता बनर्जी ने बताया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में संथाली भाषा को सरकारी भाषा का दर्जा मिला। इसके अलावा, डब्ल्यूबीसीएस परीक्षा में संथाली भाषा को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया गया है। ओलचिकी लिपि में पाठ्यपुस्तकों तथा संथाली भाषा में त्रिभाषी शब्दकोश का प्रकाशन किया गया है। संथाली भाषा में पठन-पाठन को बढ़ावा देने के लिए कई नए स्कूल भी खोले गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि संथाली के साथ-साथ कुरुख, कुड़माली, नेपाली, हिंदी, उर्दू, राजबंशी, कामतापुरी, पंजाबी और तेलुगु भाषाओं को भी उनकी सरकार ने सरकारी भाषा का दर्जा दिया है। वहीं सादरी भाषा के विकास और मानोन्नयन के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सभी भाषाओं का समान रूप से सम्मान करती है।
अंत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर इस महान व्यक्तित्व को श्रद्धापूर्वक नमन किया।