Please wait
select city
notifications
Live Tv
Search
मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने प्रम्बानन मंदिर पुनरुद्धार परियोजना का शुभारंभ किया Sudhir wins historic शोपियां मुठभेड़ में लश्कर कमांडर जाकिर गनी मारा गया Sudhir wins historic बारुईपुर मुठभेड़ मामले में पुलिस का दावा - एसआई रॉनी सरकार की रिवॉल्वर छीनकर भाग रहा था आरोपित, आत्मरक्षा में पुलिस ने चलाई गोली Sudhir wins historic बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामला : पुलिस मुठभेड़ में मारे गए आरोपित से मां ने किया किनारा, बोलीं- जो किया, उसका फल मिला Sudhir wins historic पश्चिम बंगाल में बारुईपुर नाबालिग दुष्कर्म-हत्याकांड का मुख्य आरोपित पुलिस मुठभेड़ में ढेर Sudhir wins historic बरूईपुर दुष्कर्म और हत्या मामला : पीड़िता के परिजनों से मिलीं भाजपा नेता लाकेट चटर्जी और मंत्री अग्निमित्रा पाल Sudhir wins historic पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, किशोरी को जीवित ही तालाब में फेंका Sudhir wins historic अभिषेक बनर्जी के जांच में सहयोग नहीं करने पर सवाल, हाई कोर्ट ने दी आवाज का नमूना देने की नसीहत Sudhir wins historic बरूईपुर दुष्कर्म-हत्या मामला : डीजी सिध्दनाथ गुप्ता ने किया घटनास्थल का निरीक्षण Sudhir wins historic फीफा विश्व कप 2026: ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार जूनियर ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से लिया संन्यास Sudhir wins historic

सुप्रीम कोर्ट में ममता की हुंकार, दलीलों से तृणमूल में नई ऊर्जा का संचार

अब 'फटाफट' मोड में 'खेला होबे'

04 Feb 2026

सुप्रीम कोर्ट में ममता की हुंकार, दलीलों से तृणमूल में नई ऊर्जा का संचार

कोलकाता। अब सिर्फ खेला नहीं, फटाफट खेला होगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह नया नारा बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत के गलियारों में उस समय हकीकत बनता दिखा, जब उन्होंने खुद एक वकील की भूमिका में चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ममता की व्यक्तिगत मौजूदगी और उनकी धारदार दलीलों ने न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी उबाल ला दिया है। तृणमूल इसे अपनी एक बड़ी नैतिक और रणनीतिक जीत के रूप में देख रही है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम। पंचोली की पीठ के समक्ष ममता बनर्जी ने भावुक और तर्कसंगत अंदाज में बंगाल का पक्ष रखा। उन्होंने आयोग पर विपक्ष शासित राज्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस प्रक्रिया में दो साल लगने चाहिए, उसे तीन महीने में समेटा जा रहा है। ममता ने अदालत को बताया कि बंगाल में 58 लाख नाम हटा दिए गए हैं और जीवित लोगों को कागजों पर मृत घोषित कर दिया गया है। उनकी इन दलीलों का असर यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों को अधिक संवेदनशील होने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का कड़ा निर्देश दिया। तृणमूल खेमे के लिए यह घटनाक्रम किसी संजीवनी से कम नहीं है। 
पार्टी का मानना है कि ममता की इस पहल से संगठन के भीतर छाई जड़ता टूट गई है। शुभेंदु अधिकारी की चेतावनियों से जो निचले स्तर के कार्यकर्ता संशय में थे, वे अब फिर से सड़क की लड़ाई के लिए तैयार दिख रहे हैं। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय और कल्याण बनर्जी जैसे नेताओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि ममता दी ने साबित कर दिया है कि वे केवल बंगाल की नेता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ सबसे मुखर चेहरा हैं। 
पार्टी का दावा है कि इस कदम से अल्पसंख्यक समुदाय और उन गरीब मतदाताओं में भरोसा बढ़ा है, जिन्हें नाम कटने का डर सता रहा था। दिलचस्प बात यह है कि ममता के इस कदम ने विपक्षी एकता में भी नई लकीर खींच दी है। जहां कांग्रेस और वाम दल इस पर बंटे हुए नजर आए, वहीं तृणमूल इसे 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए एक मास्टरस्ट्रोक मान रही है। सोमवार, 9 फरवरी को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है। यद्यपि ममता का दोबारा जाना अभी तय नहीं है, लेकिन तृणमूल नेताओं का स्पष्ट कहना है कि ममता दिल्ली गईं नहीं, बल्कि दिल्ली पर छा गईं। इस अदालती संघर्ष ने बंगाल की चुनावी बिसात पर खेला को एक नए और आक्रामक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। 

Ad Image
Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


सुप्रीम कोर्ट में ममता की हुंकार
अब 'फटाफट' मोड में 'खेला होबे'





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News