विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
बेटे पर लगाम कसें, लालबत्ती से दूर रहें
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के शोर के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार को सार्वजनिक मंच से खरी-खोटी सुनाकर कड़ा संदेश दिया है।
रानीगंज में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा के दौरान ममता बनर्जी ने जमुडिय़ा से तृणमूल के उम्मीदवार हरेराम सिंह को दो-टूक शब्दों में नसीहत दी कि वे अपने बेटे की गतिविधियों पर लगाम लगाएं और उसे लालबत्ती लगी गाड़ी से दूर रहने की चेतावनी दें। मुख्यमंत्री के इस तेवर ने साफ कर दिया है कि चुनाव के समय वह पार्टी की छवि से समझौता करने वाले किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेंगी। दरअसल, यह पूरा विवाद जमुडिय़ा के निवर्तमान विधायक और वर्तमान उम्मीदवार हरेराम सिंह के बेटे प्रेमपाल सिंह से जुड़ा है। प्रेमपाल सिंह, जो आसनसोल जिला तृणमूल युवा इकाई के पदाधिकारी हैं, पिछले कुछ समय से अपनी गाड़ी पर लालबत्ती लगाने को लेकर विवादों में रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि तृणमूल सरकार ने करीब पांच साल पहले ही मंत्रियों और रसूखदार नेताओं के वाहनों पर लालबत्ती के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, सत्ता के इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के प्रति मोह ने पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। विवाद तब और गहरा गया जब रामनवमी के एक कार्यक्रम के दौरान प्रेमपाल सिंह का एक कथित बयान वायरल हुआ। इसमें उन्हें यह कहते सुना गया कि मंत्री हम ही बनाते हैं, मुझे मंत्री पद की जरूरत नहीं, मैं शुरू से विधायक हूं और विधायक ही रहूंगा। इस अहंकारपूर्ण बयान ने न केवल विपक्ष को हमला करने का मौका दिया, बल्कि खुद तृणमूल नेतृत्व को भी रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी ने रानीगंज की सभा में विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए अचानक अपना रुख कड़ा किया और सीधे उम्मीदवार को टोकते हुए अनुशासन का पाठ पढ़ाया। मुख्यमंत्री की इस सार्वजनिक फटकार के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, प्रतिक्रिया देते हुए उम्मीदवार हरेराम सिंह ने बचाव की मुद्रा अपनाते हुए कहा कि दीदी का संदेश सर्वोपरि है और जमुडिय़ा की जनता पार्टी के काम को देखकर ही वोट देगी। उन्होंने लालबत्ती के मुद्दे को विपक्ष की साजिश करार दिया। दूसरी ओर, भाजपा उम्मीदवार बिजन मुखर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि जमुडिय़ा जैसे शांत इलाके में जो स्थितियां बनी हैं, उसी का नतीजा है कि खुद मुख्यमंत्री को अपने उम्मीदवार को मंच से डांटना पड़ा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कदम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वह जनता को यह संदेश देना चाहती हैं कि भ्रष्टाचार या सत्ता के अहंकार के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति अपनों पर भी उतनी ही सख्ती से लागू होती है जितनी विरोधियों पर। चुनाव के इस नाजुक मोड़ पर आई यह मंचीय चेतावनी आने वाले दिनों में जमुडिय़ा के चुनावी समीकरणों को किस दिशा में मोड़ती है, यह देखना दिलचस्प होगा।